मध्यप्रदेश में सबसे पहले जनजातियों ने फूँका था आजादी के संघर्ष का बिगुल, जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष
भोपाल। भारत की संस्कृति, स्वाभिमान और स्वायत्तता के लिए जितना बलिदान और संघर्ष जनजातियों का है, वैसा उदाहरण संसार में कहीं नहीं मिलता। भारत में प्रत्येक विदेशी आक्रमणकारी के विरुध्द जनजातियों ने सबसे पहले शस्त्र उठाये हैं। यदि देशी सत्तायें पराभूत हुईं हैं तो उन्हें संरक्षण देने का कार्य भी जनजातियों ने ही किया है। इतिहास में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं है जब किसी आक्रमणकारी के भय या लालच से भ्रमित होकर जनजातियों ने घात किया हो। अंग्रेजी राज … मध्यप्रदेश में सबसे पहले जनजातियों ने फूँका था आजादी के संघर्ष का बिगुल, जनजातीय गौरव दिवस पर विशेष को पढ़ना जारी रखें
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