यातायात के नियमों के उल्लंघन का मतलब है मौत को दावत -एडीजी श्री सागर

  
Last Updated:  जुलाई 5, 2021 " 07:06 अपराह्न"

उज्जैन|अतिरिक्त पुलिस  महानिदेशक पुलिस प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान श्री डीजे सागर ने बताया हैं कि नियम विरुद्ध गति से गाड़ी चलाने वालों  से पूछो कि वो  नियम के अधीन रहकर वाहन  क्यों नहीं चलाते। तो उनके जवाब और तर्क कुछ इस प्रकार होते हैं :- पता नहीं क्यों?, बस यूँ गए और  यूँ आए?,जल्दी में थे?, तेज़ गति में मज़े लेने का चस्का?, यार दोस्तों के संग मस्ती?,  हमारा कोई क्या बिगाड सकता है?, देखें तेज़ चल कर, कैसा लगता है? शेखी बगारना?नई गाड़ी का नशा? नशे में गाड़ी चलाना? देखें तेज़ गाड़ी कैसे चलती है? इन मनोभावों या अन्य किसी मनोविकारों से निर्धारित गति से अधिक  तेज़ गति से गाड़ी चलाना संकटपूर्ण और संकटापन्न स्थिति को न्यौता देता है, दावत देता है। यह एक उद्दण्डता है,नियम विरुद्ध कृत्य है और अक्षम्य है क्योंकि इस का परिणाम स्वयं की और अपनों की अकाल दर्दनाक मौत है।
    एडीजी श्री सागर ने बताया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के द्वारा प्रसारित  2019 के देश व्यापी आंकड़ों का शोध यही बताता है कि नियम विरुद्ध गति से गाड़ी चलाने से सर्वाधिक मृत्य होती है। पुलिस, परिवहन विभाग और जनता स्वयं आकलन करे कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में किस ओर विवेकपूर्ण ध्यान केंद्रित करना है? राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सड़कों पर 64,880 दुर्घटनाएं हुई जो कि संपूर्ण सड़क दुर्घटनाओं का 73.5 % है । इस के कारण 25,054 लोग दर्दनाक मौत को प्राप्त हुए जो कि संपूर्ण दुर्घटनाओं का 70.4 % है।
    राष्ट्रीय राजमार्ग, पी डब्लू डी की  सड़कों पर  26,743 दुर्घटनाएं हुई जो कि संपूर्ण सड़क दुर्घटनाओं का 68.7% है। इस के कारण  8,530 लोग दर्दनाक मौत को प्राप्त हुए जो कि संपूर्ण  दुर्घटनाओं का 63.2 % है।
    राष्ट्रीय राजमार्ग  की सड़कें जो अन्य विभागों के अधीन है उन पर 6,871 दुर्घटनाएं हुई जो कि संपूर्ण सड़क दुर्घटनाओं का 63.2 % है। इस के कारण 2982 लोग दर्दनाक मौत को प्राप्त हुए जो कि संपूर्ण  दुर्घटनाओं का 62.5 % है।
    निर्धारित गति से अधिक गति से गाड़ी चलाने को और अधिक घातक मृत्यु निष्ठ बनाने में जिन अन्य नियमों का उल्लंघन होता है वे हैं: शराब / नशे का सेवन(3.5% दुर्घटनाएं), गलत लेन में गाड़ी चलाना(5.1% दुर्घटनाएं) लाल बत्ती जंप करना। (0.6% दुर्घटनाएं) मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए गाड़ी चलाना।(2.6% दुर्घटनाएं)। सीट बेल्ट नहीं बांधना और गुणवत्तापूर्ण हेल्मेट सही ढंग से सिर पर नहीं पहनना आदि कारणों का प्रतिशत 14.7% है।
    अब जनता यह तय कर ले कि देश भक्ति नियम विरुद्ध गाड़ी चलाने में है या नियमानुसार गाड़ी चलाने में ?? जो व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं में अकाल दर्दनाक और हृदयविदारक मौत को प्राप्त होते हैं, वह देश भक्ति और जन सेवा में अपना अपना योगदान दे रहे होते हैं परंतु नियम विरुद्ध गाड़ी चलाने से उनका अमूल्य जीवन समाप्त हो जाता है। 
    श्री सागर ने कहा कि यह अत्यंत दःखद और पीड़ा दायक है कि भोपाल में  कुछ दिन पूर्व, एक पुलिस के अधिकारी को एक कार वाले ने नियम विरुद्ध गति से कार चला कर मौत के घाट उतार दिया। यह अत्यंत चिंतन का विषय है कि जनता नियम विरुद्ध कृत्य क्यों करती है ? क्या उन्हें दूसरों के दुख में अपनें और अपनों का दुख दर्द बिल्कुल महसूस नहीं होता। ज़रा सोचिए कि उस दुर्घटनाग्रस्त जांबाज कर्मठ पुलिस अधिकारी के परिवार का क्या होगा जिस में उसकी 2 वर्ष की नन्ही बेटी भी शामिल है?
    कबीरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर । जो पर पीर न जानही, सो का पीर में पीर ।। भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि जो इंसान दूसरे की पीड़ा और दुःख को समझता है वही सज्जन पुरुष है और जो दूसरे की पीड़ा ही ना समझ सके ऐसे इंसान होने से क्या फायदा।

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