MP: नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को दिया अंतिम रूप

  
Last Updated:  मार्च 9, 2026 " 04:03 अपराह्न"

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को दिया अंतिम रूप

जल संरचनाओं की सघन सफाई और प्याऊ स्थापना के साथ अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान
जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त करने और जन-सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर

भोपाल(स्पष्ट खबर)। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ में प्रदेश की जल संपदा को सहेजने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास हेतु सुदृढ़ रणनीति तैयार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार इस कार्य योजना का मुख्य ध्येय नगरीय निकायों में पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार करना और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है। इस अभियान में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए शासन ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि वे नदियों, तालाबों, बावडियों और नालों के किनारों पर किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तत्काल हटाने की प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें। जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त बनाने से न केवल उनके प्राकृतिक स्वरूप को लौटाया जा सकेगा। साथ ही वर्षा जल के निर्बाध प्रवाह से भू-जल स्तर में भी आशातीत वृद्धि होगी।

अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं, जिसमें अमृत 2.0 से प्रदेश की 112 जल संग्रहण संरचनाओं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है, के जीर्णोद्धार के लिये 67 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण की योजना पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। विभाग ने आगामी समय में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं के वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धन और 5000 नाले-नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। नगरीय क्षेत्रों में जल संचय की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी, जो भविष्य की जल सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।

नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभाग ने समस्त नगरीय निकायों में रणनीतिक स्थलों जैसे प्रमुख बाजारों, बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल सुलभ हो सकेगा। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को नवीन हरित क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी। आगामी मानसून सत्र के दौरान प्रदेश भर में 1 करोड़ पौधों के रोपण की तैयारी भी की गई है। अभियान में युवा शक्ति की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये 5000 युवाओं को ‘अमृत मित्र’ के रूप में MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा, जो जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह एकीकृत कार्य योजना न केवल प्रदेश की जल धरोहरों को संरक्षित करेगी बल्कि एक स्वच्छ और हरित मध्यप्रदेश के संकल्प को भी साकार करेगी।

 194 total views

Facebook Comments

Related Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *