ए आई और जेन जी से पत्रकारिता के समक्ष चुनौती बड़ी – काश्यप

  
Last Updated:  अक्टूबर 3, 2026 " 07:43 अपराह्न"

AI और जेन जी से पत्रकारिता के समक्ष चुनौती बड़ी – काश्यप


रतलाम ,3 अक्टूबर(स्पष्ट खबर)।
एमएसएमई मंत्री चेतन्‍य काश्यप में कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है। देश के जेन जी की प्राथमिकता में एकरुपता नहीं है। हमारे देश के अलग-अलग हिस्से में युवा की प्राथमिकता अलग-अलग हैं। ए आई और जेन जी से पत्रकारिता के समक्ष चुनौती बढ़ गई है।


स्टेट प्रेस क्लब मप्र द्वारा इंदौर में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का महोत्सव इंदौर की भूमि से ही संभव है। इंदौर, उज्जैन महोत्सव की नगरी है। शिव गंगा अभियान पत्रिकारिता के क्षेत्र के लोगों के लिए अध्ययन का विषय है। हिंदी पत्रकारिता को ऊंचाई पर पहुंचाने में राजेंद्र माथुर ने अहम योगदान दिया। इलना को ऊंचाई तक पहुंचाया। अब अखबारों में जिले को पेज दे देते हैं। सोशल मीडिया ने भी चुनौती को बढ़ाया है। अब ए आई ने भी चुनौती का स्वरूप बदल दिया। उन्होंने कहा कि महोत्सव तो उत्सव का रुप होता है। भारत में जेन जी के मायने अलग है। देश का अलग-अलग शहर के जेन जी की मानसिकता अलग-अलग है। मुंबई दिल्ली से लेकर इंदौर, उत्तर प्रदेश तक जेन जी की प्राथमिकता अलग है। यह उम्र सपने को साकार करने की है। पत्रकारों के लिए बड़ी चुनौती इस मध्याम पर भरोसा की है। देश में विश्वसनीयता का संकट है। पहले नेताओं पर भरोसा करते थे लेकिन अब नहीं करते हैं। पत्रकारिता में सामग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठता है। सूचना देने के साथ नेरेटिव सेट करने की चुनौती है।
श्री काश्यप ने कहा कि पत्रकारिता के बदलते आयाम में युवाओं को जोड़ना होगा। इस वर्ग से संवाद स्थापित नहीं हुआ तो यह पीढ़ी दिशाहीन होगी। इन्हें सही मार्ग दिखाना जरूरी है। इन्हें अपने देश की स्थिति और आवश्यकता की जानकारी देना होगी। नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण हमने देखा है वहां पर युवाओं की सरकार बनी लेकिन आज स्थिति किसी से छुपी नहीं है।


उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्कील पार्क भोपाल में स्थापित कर रहे हैं। इससे युवाओं को लाभ होगा। प्रदेश में 7500 स्टार्टअप पंजीकृत हैं। अब हमने नए स्टार्टअप को ₹10000 प्रतिमाह देना शुरू कर दिया है। परिवार और समाज नई बात की उपेक्षा करते है। सरकार यहां पैसा इसलिए दे रही है ताकि युवा को उपेक्षा का शिकार नहीं होना पड़े और वह अपने आइडिया को साकार कर सकें। 2047 का भारत आर्थिक ही नहीं सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विकसित होना पड़ेगा। यह भारत अवसरों से भरा होगा। आज राजनीतिक दल युवाओं के बीच नहीं जा पा रहे हैं।

 21 total views

Facebook Comments

Related Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *