अपनो के लिए अमेरिका से आई मदद, अपनी बचत पूँजी में से रिटायर्ड दंपत्ति ने की एक हजार डॉलर की मदद-
भोपाल| ‘अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥‘ (अनुवाद : ‘ लक्ष्मण! यद्यपि यह लंका सोने की बनी है, फिर भी इसमें मेरी कोई रुचि नहीं है। (क्योंकि) जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।) मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा लक्ष्मण को कहे गए ये वचन अमेरिका में रह रहे शाजापुर निवासी सक्सेना दंपत्ति ने वर्तमान में प्रासंगिक सिद्ध कर दिए। नि:स्वार्थ समर्पण का भाव लिए श्री आर.सी. सक्सेना (दद्दा) और श्रीमती इंदु सक्सेना और पढ़े
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