धामनोद नगर परिषद का विशेष सम्मिलन, निरस्त या स्थगित? किसे है बैठक बुलाने का अधिकार?… देखिए पूरी जानकारी.

  
Last Updated:  जनवरी 24, 2026 " 03:24 अपराह्न"

Ratlam: धामनोद नगर परिषद का विशेष सम्मिलन, निरस्त या स्थगित? किसे है बैठक बुलाने का अधिकार?… देखिए पूरी जानकारी.

गणपूर्ति के अभाव में विशेष सम्मिलन निरस्त, परिषद के 12 पार्षद रहें अनुपस्थित, नगर परिषद के सूचना पटल पर चस्पा किया सम्मिलन निरस्त की सूचना

रतलाम (स्पष्ट खबर)। जिले के नगर परिषद धामनोद के विशेष सम्मेलन में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय सहित 12 पार्षद रहें अनुपस्थित। विशेष सम्मिलन में गणपूर्ति नहीं हो ने से अध्यक्ष ने विशेष सम्मिलन किया निरस्त। जो नगर में चर्चा का विषय होने के साथ ही कई प्रश्न उठा रहा है।

20 जनवरी 2026 को नगर परिषद कार्यालय द्वारा पार्षदों को विशेष सम्मिलन की सुचना कार्यसूची सहित भेजीं गई थी। 23 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे नगर परिषद कार्यालय सभाकक्ष में 26 जनवरी 2026 ‘गणतंत्र दिवस’, नामांतरण,पेंशन की स्वीकृति के लिए सम्मेलन आयोजित किया गया था। लेकिन इस सम्मेलन में सिर्फ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड क्रमांक 11 के निर्दलीय पार्षद की ही उपस्थिति रही। बता दें कि नगर परिषद धामनोद में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कुल 15 पार्षद है पर इस सम्मेलन में 12 अनुपस्थित रहे। जिसमें 10 भाजपा के 1 कांग्रेस और 1 निर्दलीय। यहां यह भी बता दें कि नगर परिषद धामनोद में साधारण और विशेष सम्मिलन में पुर्व में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी की गणपूर्ति के अभाव में परिषद की बैठक ही स्थगित या निरस्त कर दी गई हों। 23 जनवरी को आयोजित बैठक में नप अध्यक्ष दुर्गा अजय डिंडोर, उपाध्यक्ष ठा. लोकेन्द्रसिंह सिसौदिया और एक निर्दलीय पार्षद मुकेश चौधरी ही उपस्थित हुए थे।

न.प कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा सम्मिलन निरस्त की सूचना

विशेष सम्मिलन निरस्त या स्थगित?

नगर परिषद धामनोद के सुचना पटल पर नगर परिषद के विशेष सम्मिलन को निरस्त करने की सूचना चस्पा किया गया है। जबकि अध्यक्ष की और से बयान में कहा जा रहा है कि वसंत पंचमी पर पार्षद शादी समारोह में गए हैं इस लिए गणपूर्ति नहीं होने के कारण विशेष सम्मिलन स्थगित किया गया है। बता दें कि निरस्त और स्थगित में मुख्य अंतर यह है कि निरस्त का अर्थ किसी कार्यक्रम/ निर्णय को पूरी तरह से रद्द या खत्म कर ना है, जबकि स्थगित का अर्थ उसे कुछ समय के लिए टालना या निलंबित करना है। निरस्त कार्य आगे नहीं होगा, लेकिन स्थगित कार्य भविष्य में पुनः शुरू किया जा सकता है।

विशेष सम्मिलन बुलाने की नोबत क्यों ?

नगर परिषद धामनोद द्वारा पिछली बैठक 24/11/2025 को साधारण सम्मिलन का आयोजन किया गया था। लेकिन उसके बाद आज दिनांक तक साधारण सम्मिलन आयोजित नहीं किया गया। जानकारी अनुसार नगर परिषद का साधारण सम्मिलन कम-से-कम दो माह में एक बार आयोजित किया जाना रहता है। लेकिन धामनोद नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा सम्मिलन बुलाने में ही लेट लतीफी की जाती रही है।
अगर साधारण सम्मिलन समय सीमा में होते तो अभी तक तो ऐसे कोई विषय भी नहीं आए हैं कि विशेष सम्मिलन बुलाने की आवश्यकता हो। परिषद के साधारण सम्मिलन समय पर आयोजित नहीं होने से कहीं ना कहीं नगर का विकास भी बाधित हो रहा है।

बैठकों के संबंध में अधिनियमों के प्रावधान-

बैठक की नियमितता:-
परिषद की बैठक दो महीने में कम से कम एक बार आयोजित की करना चाहिए।

परिषद की बैठके दो प्रकार की होती है, साधारण बैठक तथा विशेष बैठक।
साधारण सम्मिलन (बैठक) सामान्य तौर पर बुलायी गई बैठक को कहा जाता है और उसके लिये बैठक की तारीख से पूरे 07 दिन पहले प्रत्येक पार्षद को बैठक की कार्यसूची अर्थात “उन विषयों की सूची जिनपर विचार कर निर्णय लिये जाने हो” भेजना आवश्यक होता है।

विशेष बैठक किसी विशेष या आवश्यक स्वरूप के विषय पर विचार करने के लिये अल्पकालिक सूचना पर बुलाये जाने वाली बैठक को कहा जाता है। ऐसी बैठक के लिये बैठक की कार्यसूची के साथ सूचना प्रत्येक पार्षद को बैठक की तारीख के पूरे 03 दिन पहले भेजा जाना आवश्यक होता है।
वहीं दोनों प्रकार की बैठकों की सूचना निकाय के सूचना पटल पर भी लगाया जाना जरूरी होता है।

परिषद की बैठक बुलाने का अधिकार-

सामान्य बैठक-
परिषद की बैठक की तारीख नगर परिषद के अध्यक्ष द्वारा नियत की जाती हैं अध्यक्ष के कार्य करने में असमर्थ होने की स्थिति में उपाध्यक्ष धारा बैठक की तारीख नियत की जा सकती है।

विशेष बैठक-
अध्यक्ष द्वारा और उसके कार्य कर सकने में असमर्थ होने की दशा में उपाध्यक्ष द्वारा जब कभी आवश्यक हो, परिषद की विशेष बैठक बुलाई जा सकती है।

परिषद के कुल निर्वाचित पार्षदों में से कम से कम एक तिहाई पार्षदों द्वारा परिषद की विशेष बैठक बुलाये जाने की लिखित में मांग पर अध्यक्ष के लिए दो सप्ताह के भीतर परिषद की बैठक बुलाया जाना बाध्यकर होता है। यदि मांग प्राप्त होने पर भी अध्यक्ष द्वारा उपरोक्त अवधि में बैठक नहीं बुलाई जाती है तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा (राज्य सरकार को सूचना के अधीन) विशेष बैठक बुलाई जा सकती है।

बैठक की अध्यक्षता-
परिषद बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाती है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता परिषद के उपाध्यक्ष द्वारा की जाती हैं। यदि उपाध्यक्ष भी बैठक में उपस्थित न हो तो बैठक में उपस्थित निर्वाचित पार्षद अपने में से किसी एक पार्षद का बैठक की अध्यक्षता के लिए चयन कर सकते हैं।

परिषद बैठक, कोरम/गणपूर्ति –
परिषद की बैठक के लिए “कोरम(गणपूर्ति)” पार्षदों की कुल संख्या का एक तिहाई निर्धारित है। यदि बैठक में किसी समय कोरम पूरा ना हो तो बैठक की अध्यक्षता करने वाले प्राधिकारी द्वारा कम से कम 15 और अधिकतम 30 मिनट तक प्रतीक्षा करने के पश्चात बैठक अगले दिन या ऐसे किसी अन्य दिन और समय के लिए स्थगित कर दी जाती है। जैसा वह नियत करें और इस संबंध में अपने निर्णय की तत्काल घोषणा की जाना होती है। स्थगित बैठक की सूचना अर्थात वह किस तारीख को और किस समयाअवधि परिषद के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी और उसे आगामी बैठक के लिए पर्याप्त सूचना माना जाना है।

बैठक का स्थगन:-
परिषद की कोई भी बैठक उसमें उपस्थित निर्वाचित पार्षदों के बहुमत से उसी दिन के किसी पश्चातवर्ती समय के लिये या किसी अन्य दिन के लिये स्थगित की जा सकती हैं।
इस प्रकार स्थगित बैठक की कार्यालय में लगाई गई सूचना आगामी बैठक की पर्याप्त सूचना मानी जाती हैं।

यदि बैठक का स्थगन अनिश्चितकाल के लिए किया जाए तो सभी पार्षदों को पुनः सूचना देना आवश्यक होता है।

अब सवाल उठता है कि परिषद की बैठक निरस्त ही करने की नौबत आखिर क्यों आईं? संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बयान मीडिया में प्रकाशित हो रहें हैं कि बैठक स्थगित की है वहीं नगर परिषद के सुचना पटल पर परिषद बैठक निरस्त किये जाने की सूचना चस्पा की गई है।
दोनों वाक्यों में विरोधाभास है। सहित जानकारी आखिर क्या है?
वहीं अगर समाचारपत्रों में प्रकाशित समाचार और उनमें परिषद जवाबदारों के बयान बैठक ‘स्थगित’ है तो बैठक कितने समयावधि के लिये स्थगित की है? इसकी कोई सूचना अभी तक प्रकाश में नहीं है।
पुरे मामले पर गौर किया जाए तो यह जवाबदारों की लापरवाही की और इंगित होता है। वहीं नप अध्यक्ष की और से कहा जा रहा है कि पार्षद शादी समारोह में गये थे, तो क्या पार्षद शादी समारोह से वापस आते ही नहीं जिसपर बैठक को स्थगित करने की जगह निरस्त ही कर दिया गया। वहीं पूरे मामले पर गौर किया जाए तो मामले में परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध भी पार्षदों की उपेक्षाओं के आरोप के मामले को और बल मिल रहा है।

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