डॉक्टर स्वेता रामावत ने कोरोना काल मे घर परिवार से 6 महीने दूर रहकर की लोगों की सेवा-
Last Updated: जुलाई 2, 2021 " 08:32 पूर्वाह्न"
मंदसौर|कोरोना एक ऐसी बिमारी, जो जब आइ तब किसी को भी इसके विषय मे कोई जानकारी नही थी,चाहे हम चिकित्सक हो या अधिकारी या प्रशासन। किसी को भी कोई अनुभव नही था। ऐसे मे जनमानस को सुरक्षित और स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी बहुत बङी थी। पहले दिन से ही मेरी टीम की ड्यूटी कोविड मे लगा दि गई थी। मार्च 20 मे पूरे जिले मे एकमात्र आरआटी टीम बनाई गई, जो 24 घण्टे काम कर रही थी। सेम्पल कलेक्शन व रोगियो को कवारेंटिन सेंटर पहुंचाना और उनके परिवार और सम्पर्क मे आए व्यक्तियो को कोविड सेंटर पहुंचाना। ऐसे माहुल में सुरक्षित कैसे रहा जाए इसके लिए घर-घर जाकर समझाइश दी गई। रमजान के समय दुर्भाग्य से गुदरी मे कोरोना फैल गया, ऐसे मे लोगो की भावनाओ का ध्यान रखते हुए उन्हे कोविड सेंटर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बाद इनकी ड्यूटी नाहटा कोरेन्टीन सेंटर पर प्रभारी के रूप मे लगाई गई। जहाँ पॉजिटिव मरीजो के उपचार की जिम्मेदारी दी गई। फिर गुदरी फीवर क्लिनिक पर ड्यूटी की ताकि वहाँ के लोगो को इलाज के लिए अस्पतालो तक ना जाना पङे। इस दौरान गुदरी की ही तरह जिला जेल मे कैदियो मे कोरोना फैलने लगा। तब 2 महिने तक जेल मे ड्यूटी की। जहा इनके द्वारा जेल को ही कोरेन्टीन सेंटर बना कर सेम्पल लिया और उपचार किया और जेल से भी को खत्म किया।
डॉ स्वेता रामावत कहते हैं कि कोविड ड्यूटी करने से ज्यादा मुश्किल मेरे लिए था, अपनी 6 साल की बेटी और परिवार से 6 महिने तक दूर रहना। लेकिन चिकित्सक होने के नाते ये मेरा कर्तव्य है, कि मै परिवार से पहले जनकल्याण को प्राथमिकता दू।