Ratlam:आजीविका मिशन की सहायता से लखपति दीदी बनी-श्रीमती कृष्णा कपासिया, दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में होगी सम्मिलित

  
Last Updated:  जनवरी 21, 2026 " 08:01 अपराह्न"

आजीविका मिशन की सहायता से लखपति दीदी बनी-श्रीमती कृष्णा कपासिया

दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में होगी सम्मिलित

रतलाम(स्पष्ट खबर)।आजीविका मिशन अपने उद्देश्य के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ग्रामीण महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त होकर गांव, प्रदेश एवं देश में अपनी पहचान बना रही है। ऐसी ही कहानी रतलाम जिले के पिपलौदा विकासखण्ड के ग्राम कंसेर निवासी कृष्णा कपासिया की । जिन्होंने मजदूरी से जीवनयापन की शुरूआत की एवं आजीविका मिशन के स्वयं सहायता से जुड़कर लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बनाई। कृष्णा स्वयं तो सशक्त हुई, उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त किया। उनकी कहानी और संघर्ष को देखते हुए इस वर्ष दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में उन्हें विशेष अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का अवसर मिला है। इससे वे बहुत उत्साहित है एवं उन्होने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को धन्यवाद दिया। रतलाम जिले के ग्राम कंसेर तहसील पिपलौदा की निवासी श्रीमती कृष्णा कपासिया पति राकेश कपासिया ने बताया कि मेरे समूह का नाम ’आदर्श आजीविका स्वयं सहायता समूह’ है और मेरे ग्राम संगठन का नाम ’सरस्वती आजीविका ग्राम संगठन’ है। मेरे सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) का नाम ’प्रतिभा सीएलएफ संकुल स्तर संगठन कालूखेड़ा’ है। मैं 2019 में समूह से जुड़ी। उससे पहले मैं एक गृहिणी थी, घर का काम करती थी और लोगों के खेतों में मजदूरी करती थी। मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी और हमें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मेरे पति पेट्रोल पंप पर काम करते थे, जहाँ उन्हें सिर्फ 3000-4000 रुपये महीने के मिलते थे। समूह से जुड़ने के बाद, मुझे सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) के माध्यम से 20,000 रुपये का ऋण मिला। जिससे मैंने पार्लर की दुकान खोली, जिसका काम मैंने पहले ही सीख रखा था। कॉस्मेटिक सामान भरा और उससे धीरे-धीरे मेरी आमदनी बढ़ने लगी, जिससे मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद मुझे सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) का काम मिला। मैंने गाँव-गाँव जाकर समूह बनाए और लगभग 46 समूह में 500 महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ा। फिर मेरा चयन ’बैंक सखी’ के रूप में हुआ। मैंने सेंट्रल बैंक कालूखेड़ा में 199 एसएचजी और 18 ग्राम संगठनों के खाते खुलवाए। मैंने 170 एसएचजी को 8 करोड़ रुपये का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) लोन दिलवाया और 28 लाख रुपये का व्यक्तिगत लोन, मुद्रा लोन, उद्यमी लोन, लखपति दीदी लोन भी करवाया।

मेरी मेहनत को देखते हुए मुझे सेंट्रल बैंक का बीसी पॉइंट (कियोस्क आईडी) मिला। समूह से मिले सीसीएल लोन से कुछ राशि लेकर कियोस्क ऑनलाइन दुकान भी खोली और प्रिंटर आदि खरीदे। मैंने पति का पेट्रोल पंप का काम छुड़वाकर उन्हें घर पर ही ऑनलाइन दुकान में सहयोग के लिए लगा लिया। अब मेरे बीसी पॉइंट पर रोजाना 2 से 4 लाख रुपये का लेनदेन होता है। इसके बाद मैंने एक स्कूटी खरीदी, जिससे मैं गांव गांव जाकर बुर्जुग व्यक्ति एवं बीमार व्यक्ति जो बैंक नहीं जा सकते उन लोगों के घर जाकर सेवा प्रदान करती हूं। मेरी महीने की आमदनी 40 हजार रूपये तथा सालाना आय लगभग 4,80,000 रुपये तक है। पार्लर और कियोस्क से होने वाली आमदनी से मैंने अपना प्लॉट खरीदकर पक्का मकान भी बना लिया है। मैंने कभी साइकिल भी नहीं चलाई थी पर आज खुद की स्कूटी चलाती हूं। मेरे जीवन में यह परिवर्तन आजीविका मिशन की सहायता से हुआ है। इसलिए मैं आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं।

 535 total views

Facebook Comments

Related Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *