MP: हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, 4 बड़े अफसरों को दो-दो माह की सज़ा.
Last Updated: मार्च 26, 2026 " 02:30 अपराह्न"
MP: हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, 4 बड़े अफसरों को दो-दो माह की सज़ा.
इंदौर (स्पष्ट खबर)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में वार्ड बॉय के नियमितिकरण से जुड़े मामले में हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी करना बड़े अधिकारियों के लिए भारी पड़ गया इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) ने चार बड़े अधिकारियों को जेल की सजा सुनाई है।
इंदौर हाईकोर्ट का 22 बार आदेश नहीं मानने पर मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव रिटायर्ड IAS मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ आयुक्त IAS तरुण राठी, रीजनल डायरेक्टर डी के तिवारी, सीएमएचओ मंदसौर गोविंद चौहान को दो महीने साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।
क्या है पूरा मामला?
ये पूरा मामला साल 2004 से 2016 के बीच नियुक्त हुए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितिकरण से जुड़ा था. मंदसौर (Mandsaur) जिले के अलग-अलग हिस्सों में वार्ड बॉय, स्वीपर जैसे कर्मचारियों को रेगुलर करने को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था, जिसको लेकर एडवोकेट प्रसन्न भटनागर और प्रवीण कुमार भट्ट (Advocates Prasanna Bhatnagar and Praveen Kumar Bhat) की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका पेश की गई थी।
हाई कोर्ट ने नियमित वेतनमान का दिया था आदेश–
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ओर से इन याचिकाओं को स्वीकार कर स्वास्थ्य विभाग को यह आदेश दिया गया था कि कर्मचारियों को दस वर्ष सेवा काल पूर्ण होने की तारीख से नियमित वेतनमान और अन्य लाभ का भुगतान किया जाए. जिसके लिए तीन महीने की अवधि तय की गई थी.
सजा को तीन सप्ताह के लिए पेंडिंग रखा गया–
इसके बाद सभी कर्मचारियों की ओर से हाई कोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका पेश की गई थी, जिसमें 22 बार समय मांगने के बाद भी हाई कोर्ट का आदेश नहीं माना गया. इसके बाद अब हाई कोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन के पूर्व प्रमुख सचिव रिटायर्ड IAS मोहम्मद सुलेमान,(Mohammad Suleman) स्वास्थ आयुक्त IAS तरुण राठी , रीजनल डायरेक्ट डी के तिवारी, सीएमएचओ मंदसौर गोविंद चौहान ने दो माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है, हाई कोर्ट की ओर से सजा को तीन सप्ताह के लिए पेंडिंग रखा गया है।