Ratlam: सीएम हेल्पलाइन एवं अन्य शिकायतों में तृतीय पक्ष के हितों को ध्यान में रख राजस्व शिकायतों का गुणवत्ता के साथ करें सावधानीपूर्वक निराकरण।
एकपक्षीय कार्रवाई से बचें, अभिलेखीय एवं मैदानी जांच के बाद ही करें शिकायत का निराकरण — प्रभावित तृतीय पक्ष को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य
पूर्व से न्यायालय में लंबित प्रकरणों में उपलब्ध वैधानिक उपचार का उल्लेख करें
रतलाम (स्पष्ट खबर)।कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सी.एम. हेल्पलाइन एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त राजस्व संबंधी शिकायतों के निराकरण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे प्रकरणों में विशेष सावधानी बरती जाए, जिनके निराकरण से किसी अन्य व्यक्ति अथवा तृतीय पक्ष के अधिकार, हित, स्वामित्व, कब्जे अथवा भूमि की सीमाएं प्रभावित होने की संभावना हो। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निराकरण केवल शिकायतकर्ता के कथन अथवा एकपक्षीय प्रतिवेदन के आधार पर नहीं किया जाए, बल्कि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, मौके की वास्तविक स्थिति तथा संबंधित पक्षों के तथ्यों का परीक्षण करने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर श्री कटेसरिया ने कहा कि उनके समक्ष स्वयं ऐसे कई प्रकरण आए हैं, जिनमें शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत तो की गई, लेकिन परीक्षण में यह सामने आया कि शिकायतकर्ता स्वयं अतिक्रमण की स्थिति में था अथवा प्रकरण में किसी तृतीय पक्ष का भी अधिकार एवं हित जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। तृतीय पक्ष के अधिकार प्रभावित होने की संभावना होने पर मामले का निष्पक्ष एवं सावधानीपूर्वक परीक्षण आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें संबंधित मामला पहले से ही सक्षम न्यायालय, कमिश्नर अथवा सिविल कोर्ट में विचाराधीन था, इसके बावजूद उसी विषय को लेकर सी.एम. हेल्पलाइन अथवा अन्य माध्यमों से शिकायतें की गईं। जन विश्वास शिविरों में भी इस प्रकार के प्रकरण सामने आए हैं। ऐसे मामलों में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायत के माध्यम से न्यायालयीन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली अथवा किसी पक्ष के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली एकपक्षीय कार्रवाई न हो।
इन राजस्व मामलों में विशेष सावधानी आवश्यक
सी.एम. हेल्पलाइन (CM Helpline) में राजस्व विभाग से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त होती हैं। इनमें नामांतरण, बंटवारा, निजी भूमि पर अवैध कब्जा, रास्ता विवाद, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, सीमांकन तथा अन्य ऐसे राजस्व प्रकरण शामिल हैं, जिनमें किसी तृतीय पक्ष के अधिकार अथवा हित प्रभावित होने की संभावना रहती है। इन मामलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए संबंधित प्रभावित पक्ष को उचित सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक होगा।
केवल पटवारी या राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन पर शिकायत बंद नहीं होगी
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि यदि प्रारंभिक प्रशासनिक परीक्षण में किसी तृतीय पक्ष के अधिकार अथवा हित से संबंधित तथ्यात्मक या विधिक विवाद प्रथम दृष्टया दिखाई देता है, तो शिकायत को केवल पटवारी अथवा राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर सीधे बंद नहीं किया जाए। सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा सी.एम. हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक का स्पष्ट उल्लेख करते हुए उपलब्ध राजस्व अभिलेख, खसरा, नक्शा, नामांतरण एवं बंटवारा आदेश, पूर्व सीमांकन अभिलेख तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए। आवश्यकता होने पर मौके का निरीक्षण कर पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक से तथ्यात्मक प्रतिवेदन भी प्राप्त किया जाए।
तृतीय पक्ष को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य
जहां जांच में यह सामने आए कि किसी चिन्हित तृतीय पक्ष के अधिकार अथवा हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकते हैं, वहां उसे यथोचित सूचना देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। केवल शिकायतकर्ता के कथन अथवा एकपक्षीय मैदानी प्रतिवेदन के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध निष्कर्ष दर्ज नहीं किया जाए।
यदि अभिलेखीय परीक्षण एवं मैदानी जांच के दौरान शिकायत में प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाते हैं और प्रकरण के निराकरण के लिए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 अथवा अन्य लागू विधि के अंतर्गत नियमित कार्यवाही आवश्यक है, तो संबंधित पक्षकार को उचित वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत करने के लिए अवगत कराया जाए तथा नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की जाए।
वहीं, अभिलेखीय परीक्षण, आवश्यक मैदानी जांच तथा संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद यदि यह पाया जाता है कि शिकायत में प्रथम दृष्टया कोई तथ्य नहीं है अथवा शिकायत राजस्व अभिलेखों एवं मौके की वास्तविक स्थिति से समर्थित नहीं है, तो प्रकरण को संक्षिप्त एवं कारणयुक्त आदेश पारित करते हुए समाप्त किया जाए।
पूर्व में निराकृत विषय पर पुनः शिकायत होने पर वैधानिक उपचार का उल्लेख करें
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि यदि किसी शिकायत के विषय में पूर्व में विधिवत आदेश पारित किया जा चुका है और समान तथ्यों के आधार पर पुनः शिकायत प्राप्त होती है, तो उपलब्ध न्यायालयीन आदेश एवं संबंधित वैधानिक उपचार का स्पष्ट उल्लेख करते हुए नियमानुसार पुनरावृत्त शिकायत का निराकरण किया जाए।
पूर्व आदेश के अनुपालन की शिकायत को पुनरावृत्त शिकायत न मानें
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि नवीन शिकायत पूर्व में पारित आदेश के अनुपालन नहीं किए जाने से संबंधित है, तो उसे मात्र पुनरावृत्त शिकायत मानकर बंद नहीं किया जाए। संबंधित अधिकारी यह परीक्षण करें कि पूर्व आदेश का वास्तविक रूप से पालन हुआ है अथवा नहीं। यदि आदेश का पालन नहीं हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सी.एम. हेल्पलाइन एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त राजस्व शिकायतों का निराकरण निष्पक्षता, पारदर्शिता, प्राकृतिक न्याय एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप किया जाए। किसी भी शिकायत के निराकरण में जल्दबाजी अथवा एकपक्षीय कार्रवाई से बचते हुए तृतीय पक्ष के अधिकारों एवं हितों की भी पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने उपरोक्त निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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