कांग्रेस विधायक होटल से विधानसभा रवाना; मंत्री तरुण भनोट ने कहा- आज फ्लोर टेस्ट का सवाल ही नहीं उठता, सरकार सुरक्षित
Last Updated: मार्च 16, 2020 " 05:37 पूर्वाह्न"
भोपाल. मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार आज फ्लोर टेस्ट का सामना करेगी या नहीं, इस पर असमंजस बना हुआ है।रविवार को भोपाल लौटे कांग्रेस के 85 विधायक होटल मैरियट में ठहरे थे। सोमवार सुबह करीब 10 बजे ये दो बसों से विधानसभा रवाना हुए। इसके पहले मीडिया से बातचीत मेंमंत्री लखन घनघोरिया ने कहा- आज फ्लोर टेस्ट होना मुश्किल है। लेकिन, विधानसभा अध्यक्ष अगर इसे आज ही कराने को कहते हैं तो कांग्रेस इसके लिए भी तैयार है। एक और मंत्री तरुण भनोट ने भी कहा- सरकार बिल्कुल सुरक्षित है।
कुछ मंत्री और विधायक अपनी गाड़ी से जाना चाहते थे लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उन्हें बस से ही विधानसभा पहुंचने के लिए कहा। बता दें कि 11 से 15 मार्च तक जयपुर में ठहरने वाले कांग्रेस के 85विधायक रविवार को भोपाल लौटे थे। इन्हें होटल मैरियट में ठहराया गया था।
भनोट बोले- सरकार सुरक्षित, पांच साल चलेगी
मैरियट होटल के बाहर कमलनाथ सरकार में मंत्री तरुण भनोट ने भी मीडिया से बातचीत की। कहा, “फ्लोर टेस्ट का सवाल ही नहीं उठता। आखिर, विधानसभा चलाने की जिम्मेदारी तो विधानसभा अध्यक्ष की ही होती है। भाजपा ने हमारे 16 विधायकों को बंधक बनाकर रखा है। वो जोड़तोड़ की राजनीति कर रही है। आज विधानसभा में कांग्रेस के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। हमारी सरकार 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगी। उसे कोई खतरा नहीं है।” दूसरी तरफ, कुछ विधायकों ने भी विधानसभा रवाना होने से पहले कहा कि जब तक बेंगलुरु में बंधक बनाए गए 16 विधायक नहीं आते, तब तक फ्लोर टेस्ट का कोई सवाल ही नहीं है।”
होटल में जाने के लिए पहचान पत्र जरूरी
होटल मैरियट के बाहर और अंदर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए। किसी भी अनजान व्यक्ति को होटल के अंदर जाने की इजाजत नहीं है। सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति है, जिनके पास पहचान पत्र हैं।
कार्यसूची में फ्लोर टेस्ट का उल्लेख ही नहीं फ्लोर टेस्ट को लेकर सस्पेंस खत्म नहीं हुआ है। उल्टा, रविवार को विधानसभा की कार्यसूची जारी होने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई। कार्यसूची में केवल राज्यपाल के अभिभाषण और धन्यवाद ज्ञापन का जिक्र किया गया है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर राज्यपाल नाराज हैं। कार्यसूची जारी होने के कुछ ही देर बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। इसमें कहा गया था कि विश्वास मत के दौरान मतों का विभाजन हाथ उठाकर किया जाए। कमलनाथ और टंडन की राजभवन में मुलाकात भी हुई। बाहर निकलने पर कमलनाथ ने कहा, “फ्लोर टेस्ट पर फैसला स्पीकर एनपी प्रजापति लेंगे। मैंने राज्यपाल को बता दिया है कि मैं फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हूं, पर पहले बेंगलुरु में बंधक बनाए गए विधायकों को रिहा किया जाए।’’