मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार 12:00 बजे क्या क्या कर सकते हैं, पढ़िए
Last Updated: मार्च 19, 2020 " 08:07 अपराह्न"
भोपाल। मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने शुक्रवार दिनांक 20 मार्च 2020 को दोपहर 12:00 बजे प्रेस कांफ्रेंस बुलाई है। यह वह दिन है जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना है। मुख्यमंत्री का 1-1 मिनट महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रेस कॉन्फ्रेंस का बुलावा कई तरह के प्रयासों को जन्म दे रहा है। आइए समझने की कोशिश करते हैं, मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार 12:00 बजे क्या कर सकते हैं:
सभी मंत्रियों के साथ इस्तीफा देकर विपक्ष में बैठेंगे
मुख्यमंत्री कमलनाथ फ्लोर टेस्ट के लिए जाने से पहले अपने शेष सभी मंत्रियों के साथ इस्तीफा दे सकते हैं। वह लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे सकते हैं ताकि जनता की सहानुभूति प्राप्त हो। राजनीति के कई विद्वान इसकी संभावनाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा बता रहे हैं।
सभी विधायकों के साथ इस्तीफा देकर मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनाएंगे
अपने सभी विधायकों के साथ इस्तीफा दे सकते हैं ताकि मध्यप्रदेश में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन जाए। प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। 2 विधायकों की मृत्यु और 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद रिक्त सीटों की संख्या 24 कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या 92, सहयोगी विधायकों की संख्या 7 24+92+7=123 मध्य प्रदेश की 53% सीटें रिक्त हो जाएंगी। सदन में भारतीय जनता पार्टी के 107 विधायक रह जाएंगे। विपक्ष में एक भी विधायक नहीं होगा। ऐसी स्थिति में 230 में से 123 सीटों पर उप चुनाव होगा या मध्य प्रदेश में मध्यावधि चुनाव।
फ्लोर टेस्ट जीतने का दावा करेंगे, क्योंकि BJP विधायकों की संख्या घट जाएगी
दिग्विजय सिंह बेंगलुरु से भोपाल के लिए रवाना हो गए हैं। स्पीकर ने सभी 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने भरोसेमंद मंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस मीटिंग के बाद सभी ने एक सुर में दावा किया कि वह फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए तैयार हैं। एक अनुमान यह भी लगाया जा सकता है कि कमलनाथ सरकार एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रही थी। पहला: बेंगलुरु में रह रहे 16 विधायकों में से कुछ को अपने साथ लेकर आना और दूसरा भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या कम कर देना। बेंगलुरु के विधायक सरकार के साथ नहीं आए, लेकिन क्या पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या 107 ही रहेगी। आइए समझते हैं: 2 विधायकों के निधन और 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा में सदस्यों की संख्या 230-24=206 कांग्रेस एवं सहयोगी के विधायकों की संख्या: 92+7=99 भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या: 107 विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी वोटों की संख्या: 104 कांग्रेस को चाहिए 104-99=05 भाजपा के तीन विधायक सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के साथ हैं। कांग्रेस को सरकार बचाने के लिए चाहिए 02 विधायक। कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा के 3 या तीन से अधिक विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे। हाल ही में हुई एक नियुक्ति और मध्य प्रदेश में सियासी संग्राम से पहले देश भर में सुर्खियां बटोरने वाला एक मामला। एक पेन ड्राइव, उसमें SAVE 12 से ज्यादा वीडियो कुछ भी करवा सकते हैं।
जब 16 कॉन्ग्रेस विधायकों ने इस्तीफे दिए थे तब एक अफवाह यह भी उड़ी थी कि 6 या 6 से अधिक भाजपा विधायकों की लिखित स्थिति कमलनाथ के पास है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान आज भी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोहराया था कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ विधायक उनसे नियमित रूप से मिलते रहते थे। यदि यह सच में है तो कल दोपहर 12:00 बजे इनका उपयोग हो सकता है।