धर्म बड़ा है या देश? उज्जैन में विकास के लिए मंदिर टूटे, CM का घर टूटा, मस्जिद की बारी आई तो बरसने लगे पत्थर!

  
Last Updated:  सितम्बर 28, 2026 " 12:40 अपराह्न"

उज्जैन(स्पष्ट खबर)।धर्म बड़ा है या देश? यह सवाल आज उज्जैन (ujjain) में फिर उठ खड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की कार्रवाई के दौरान जिस तरह तनाव बढ़ा, पथराव हुआ और पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल यह है कि जिस सड़क चौड़ीकरण के लिए 10 मंदिरों के हिस्से हटाये गये, जिस सड़क के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने अपने पैतृक घर पर खुद गैंती चलाई हो, उस सड़क की राह में एक वर्ग विशेष के लोग रोड़े क्यों अटका रहे हैं?

सवाल यह भी है कि यदि किसी धर्म विशेष का हिस्सा विकास की राह में आ रहा है और उसे हटाना जनहित में है तो उसे हटाने की पहल खुद उस धर्म से जुड़े लोग क्यों नहीं कर रहे? विरोध करना भी है तो शांतिपूर्ण विरोध क्यों नहीं? पुलिस और प्रशासन पर पत्थरबाजी कर क्या संदेश दिया जा रहा है?

सिंहस्थ के लिए जरूरी है चौड़ीकरण

दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए प्रशासन खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा और गणेश चौक तक करीब 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा कर रहा है। लागत करीब 9.80 करोड़ है। इस परियोजना की जद में 272 संरचनाएं चिन्हित हैं, जिनमें धार्मिक और निजी दोनों संपत्तियां हैं।

प्रशासन का तर्क साफ है – जब 8 लाख की आबादी वाले शहर में 30-40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे तो यातायात और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना ही पड़ेगा।

इस अभियान को मुख्यमंत्री ने खुद प्रतीकात्मक शुरुआत दी। उन्होंने अपने अब्दालपुरा स्थित पैतृक मकान के हिस्से पर खुद गैंती चलाई और कहा – “यह मकान पिताजी की मेहनत से बना था, आंख भी नहीं खोली थी तब से है, भावुक क्षण है, लेकिन कर्तव्य की वेदी पर यह त्याग जरूरी है। हम मुआवजा भी नहीं लेंगे।” यही उदाहरण अब प्रशासन का सबसे बड़ा तर्क है।

कोर्ट भी कह चुका – प्रक्रिया सही है

इस विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि भी अहम है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सितंबर में याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि नगर निगम ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और प्रभावित पक्षों को आपत्ति का अवसर दिया। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार इसी मार्ग पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्सों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है और उज्जैन में लगभग 80 धार्मिक स्थलों से जुड़ी संरचनाओं पर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई हुई है। कोर्ट ने इसे व्यापक जनहित से जुड़ा माना।

लेकिन कोर्ट का आदेश जमीन पर विवाद खत्म नहीं कर सका। सोमवार को शाही मस्जिद पर कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और विरोध टकराव में बदल गया। पथराव के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भारी पुलिस बल व RAF तैनात करनी पड़ी।

असली चुनौती शांति की है

सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, प्रशासनिक परीक्षा भी है। सवाल अब सिर्फ सड़क का नहीं, सामाजिक शांति का है। एक तरफ समय पर शहर को तैयार करना है, दूसरी तरफ कानून और विश्वास बनाए रखना है।

आज की झड़प ने साफ कर दिया है कि सिंहस्थ की तैयारी में सबसे कठिन मोर्चा सिर्फ यातायात का नहीं, बल्कि शांति का भी है। विकास की इस रफ्तार में कानून-व्यवस्था और सामाजिक विश्वास की सड़क कहीं संकरी न पड़ जाए, यह देखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रशासन शांति कायम रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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