Badvani:पुरातात्विक अध्ययन डायनासोर के अंडे को छूकर देखा, कल्पना में देखी करोड़ों वर्ष पूर्व की दुनिया- वर्षा

  
Last Updated:  जुलाई 29, 2024 " 07:23 अपराह्न"

बड़वानी। हमने डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान, बाग की शैक्षणिक यात्रा की। यह हमारे जीवन का यादगार अनुभव रहा। हमने वहाँ करोड़ों वर्ष पूर्व के शाकाहारी डायनासोर के पुराने पेटीकृत अंडे, उनकी हड्डियों, नर्मदा घाटी में पाई जाने वाली शार्क मछली के अवशेष, वृक्षों के अवशेष फासिल्स अर्थात जीवाश्म के रूप में देखा। मैंने अंडे को हाथ में उठाकर तस्वीर भी खिंचवाई। पिछले भू-वैज्ञानिक युग में विद्यमान किसी पौधे या पशु के मिट्टी में से खोदकर निकाले गए अवशेषों को जीवाश्म क़हते हैं। हम कल्पना कर रहे थे कि करोड़ों वर्ष पहले की हमारी दुनिया कैसी रही होगी। ये बातें वर्षा मुजाल्दे ने आज शैक्षणिक यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुये प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के नव-प्रवेशित विद्यार्थियों से कहीं। प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य के निर्देशन में स्वामी विवेकानन्द करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के माध्यम से एक्सपोजर विजिट के अंतर्गत धार जिले में स्थित डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान, बाग का भ्रमण किया। प्राचार्य डॉ. सत्य ने कहा कि यात्रा करने के उपरांत यात्रा के अनुभव और यात्रा से प्राप्त ज्ञान को अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा करने की परंपरा एक अच्छी परंपरा है। इससे यात्रा का लाभ अनेक युवाओं तक पहुंचता है और वे ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित होते हैं। 89 एकड़ में विकसित हो रहा है राष्ट्रीय उद्यान स्थानीय गाइड वेस्ता मंडलोई ने यात्रा के दौरान बताया कि यह अपनी तरह का अनूठा राष्ट्रीय उद्यान है, यह 89 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित हो रहा है। यहाँ पर पुरानी सभ्यता, पौधों और जानवरों का सटीक अंदाजा लगाने के लिए जीवाश्मों का बहुत बड़ा भंडार है। यह इस विषय के अध्ययन और शोध का एक प्रमुख केंद्र होगा। कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने धार जिले की अधिकृत वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करके विद्याथियों को बताया कि यहाँ शाकाहारी डायनासोर के 65 मिलियन वर्ष पुराने पेटीकृत अंडे हैं, जिन्हें इतिहास में पाए गए सबसे बड़े अंडों में से एक माना गया है। इसी तरह सॉरोपॉड और एबेलिसॉरस डायनासोर की 65 से 100 मिलियन वर्ष पुरानी हड्डी, नर्मदा घाटी में मिले शार्क मछली के 74 से 100 करोड़ साल पुराने अवशेष, 86 मिलियन वर्ष पुराने जीवाश्म समुद्री जीव और 70 मिलियन वर्ष पुराने, नर्मदा घाटी के अत्यंत लंबे पेड़ों के अवशेष हैं। अनुशासन देखकर हुई खुशी स्थानीय गाइड धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि सम्पूर्ण भ्रमण के दौरान कॉलेज के विद्यार्थियों ने जो उच्च कोटि का अनुशासित आचरण प्रस्तुत किया, उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। युवा पीढ़ी का संयमित व्यवहार अच्छा लगा। इस अध्ययन में धर्मेन्द्र शर्मा, प्रो. जितेन्द्र ठाकुर और भेरुलाल हम्मड़, राहुल भंडोले, स्वाति यादव, रिकेश तोमर, सौरभ यादव, कमलेश वर्मा, निखिल पटेल, रागिनी यादव, सुरेश कनेश, बादल धनगर, अनिल मंडलोई, अरविंद सोलंकी, डावर सिंह नागर, हर्षिता यादव एवं डॉ. मधुसूदन चौबे ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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