….तो पूर्व सरपंच से लेकर नगर परिषद के प्रभारी जवाबदारों के हाथ भी भष्ट्राचार के रंग में रंगे मिलेगें?

  
Last Updated:  सितम्बर 15, 2020 " 04:31 अपराह्न"

रतलाम/धामनोद:15,सितंबर 2020(स्पष्ट खबर)| रतलाम जिले के धामनोद नगर के चर्चित मामले फर्जी एवं अपात्र व्यक्तियों को अनुदान में दिये गये आवासीय भूखण्ड पट्टों को लेकर नागरिकों द्वारा शिकायत जिला कलेक्टर को करने के बाद फर्जी तथा अपात्र आवासीय भूखण्ड पट्टाधारी कतिपय व्यक्तियों एवं इनसे सांठगांठ करने वाले नगर परिषद के संबंधितो की धडकने तेज़ हो गई है |
आरोप है कि नगर परिषद के जवाबदारों तथा पूर्व ग्राम पंचायत सरपंच ने सांठगांठ कर धामनोद नगर में अनुदान में आवासीय भूखण्ड पट्टे फर्जी तोर पर जारी किये और उन फर्जी एवं अपात्र व्यक्तियों के पट्टे नगर परिषद कार्यालय की कर दाता सूची में शामिल कर अवैध से वैध किये गए हैं|
इस विषय में जिला कलेक्टर को अलग अलग व्यक्तियों द्वारा शिकायत करने के साथ ही हाल ही में जिला कलेक्टर को संबोधित ज्ञापन भी दिया गया है ,
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार उक्त शिकायतों एवं ज्ञापन के मामले में शिकायत कर्ता तथा ज्ञापन देने वालों के बयान के साथ दस्तावेज जांच में लिए जाने की प्रक्रिया चलने की खबर है,

धामनोद सीएमओ द्वारा अवैध भूखण्ड को वैध करने तथा वैध को दर्ज नहीं करने को लेकर ज्ञापन…


वहीं इस विषय में सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज करवाई गई है|
नगर परिषद के जवाबदारों एवं एवं कतिपय लोगों में आवासीय भूखण्ड पट्टे निरस्त होने का भय है जिस से कतिपय फर्जी आवासीय भूखण्ड पट्टाधारी रात के अंधेरे में उक्त शासकीय खाली भूमि पर चोरी छूपे निर्माण कर कब्जा किया जा रहा हैं
लेकिन नगर परिषद द्वारा इन पर रोक नहीं लगा कर मौन सविकृति दी जा रहीं है जिस से इंगित है कि नगर परिषद के जवाबदारों की इस में मिली भगत है|

धामनोद: फर्जी आवासीय पट्टों को आधार बना कर किया बडा़ भूमि घोटाला…

गरीब पात्र परिवार किराये के मकान एवं झोपड़ों में रहने को मजबूर है लेकिन धनाठी एवं अपात्र परिवारों को अनुदान-

धामनोद नगर में ऐसे कई परिवार निवासरत है जो गरीबी के साथ जवाबदारों के शोषण की दास्ताँ बयां कर रहे है, इनके पास आवास, भूखण्ड तथा कृषि भूमि तक नहीं है फिर भी इन्हें आवासीय भूखण्ड का आवंटन नहीं कर नगर के धनाठी एवं रसूखदार परिवारों के कतिपय लोगों में शासकीय भूमि पर प्रथक प्रथक आवासीय भूखण्ड पट्टे अनुदान में देकर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कराया गया है,
तथा इनके साथ केवल इतिश्री पुरी करने के लिए जिन जरूरतमंद गरीब पात्र व्यक्तियों को आवासीय भूखण्ड पट्टे जारी किये है उनमें से कई आवासीय भूखण्ड पट्टों को आज तक नगर परिषद रिकॉर्ड में दर्ज नही किया गया है जब की यह परिवारों द्वारा भूखण्ड पर झोपड़े बना कर निवास भी कर रहे है|
वहीं धनाठी एवं रसूखदार परिवारों को अनुदान के नाम पर जारी किये गए आवासीय पट्टों के भूखण्ड वर्षों से अनुपयोगी हो कर नगर में गंदगी फैला रहें हैं जिनकोे नगर परिषद ने कर रिकॉर्ड में दर्ज कर अवैध से वैध बनाने का कारनामा किया गया है
सनद रहे की ग्राम पंचायत कार्यकाल के आवासीय भूखण्ड पट्टा प्रमाण पत्र पर स्पष्ट लिखा रहता है की एक वर्ष के भीतर निर्माण नहीं किया जाता है तो पट्टा स्वत निरस्त माना जाएगा, लेकिन नगर परिषद की मेहरबानी से अपात्र भी पात्र हो गयें और पात्र बनगया अपात्र|
इस विषय में अगर जांच उच्च अधिकारियों से करवाई जाए तो पूर्व सरपंच से लेकर नगर परिषद के प्रभारी जवाबदारों के हाथ भी भष्ट्राचार के रंग में रंगे मिलेगें?|

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