एक जिला एक उत्पाद: चिन्नौर की खेती देखने कलेक्टर पहुंचे किसान के खेत

  
Last Updated:  सितम्बर 24, 2021 " 09:00 अपराह्न"

बालाघाट।  एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत बालाघाट जिले में चिन्नौर एवं बांस का चयन किया गया है। इसके अंतर्गत चिन्नौर एवं बांस की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा आज 24 सितम्बर को चिन्नौर की खेती देखने ग्राम कायदी के किसान सुखचंद शिवहरे के खेत में पहुंचे थे। उन्होंने खेत में लगी चिन्नौर धान की फसल देखी और गांव के किसानों से इस संबंध में चर्चा भी की।
    इस दौरान वारासिवनी एसडीएम श्री संदीप सिंह, उप संचालक कृषि श्री सी आर गौर, सहायक संचालक उद्यान श्री सी बी देशमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव के प्रमुख डॉ आर एल राउत, डॉ उत्तम बिसेन एवं कृषि व उद्यान विभाग के अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
    चिन्नौर चावल के नाम से बालाघाट जिले की एक अलग ही पहचान है। चिन्नौर चावल प्राकृतिक रूप से सुगंधित होता है और खाने में स्वादिष्ट होता है। चिन्नौर चावल का दाना बहुत छोटा होता है। अपने इन्ही गुणों के कारण चिन्नौर का चावल बाजार में 140 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर बिकता है। चिन्नौर की खेती वारासिवनी एवं लालबर्रा तहसील के 25 ग्रामों में किसानों द्वारा की जाती रही है। लेकिन समय के साथ इसकी खेती करने वाले किसानों की संख्या कम होती चली गई। अब एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत फिर से इसकी खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    कलेक्टर डॉ मिश्रा ने ग्राम कायदी में किसान सुखचंद शिवहरे के खेत में लगी चिन्नौर की फसल को देखा। किसान सुखचंद ने बताया कि बेशक चिन्नौर का चावल मंहगा बिकता है, लेकिन इसकी खेती करने में लागत अन्य धान की तुलना में अधिक आती है। चिन्नौर की फसल को केवल जैविक खाद की जरूरत होती है, इसे रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती है। यह अधिक दिनों में पकने वाली फसल है और इसमें पानी अधिक लगता है। इसके पौधे अधिक उंचाई के होते है, जब फसल पक कर तैयार हो जाती है तो इसके पौधे जमीन पर गिर जाते है, जिसके कारण इसे मशीन से नहीं काटा जा सकता है। सुखचंद ने बताया कि उसके द्वारा एक एकड़ में चिन्नौर की फसल लगाई गई है। गांव में अन्य किसान भी चिन्नौर की फसल लगाते है।
    इस दौरान डॉ उत्तम बिसेन ने बताया कि एक जिला उत्पाद के अंतर्गत चिन्नौर के रकबे को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इस वर्ष जिले के लगभग 03 हजार एकड़ क्षेत्र में चिन्नौर की फसल लगाई गई है। इसे जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली गई है। आने वाले वर्ष में इसका रकबा और अधिक बढ़ाया जायेगा।
कृषि महाविद्यालय का किया निरीक्षण
    कलेक्टर डॉ मिश्रा ग्राम कायदी के बाद कृषि महाविद्यालय मुरझड़ पहुंचे और वहां पर धान की खेती पर बनाये गये संग्रहालय का निरीक्षण किया। इस संग्रहालय में धान की जिले में लगाई जाने वाली सभी तरह की प्रजातियों के साथ ही 400 प्रजातियों का संग्रह रखा गया है। यह मध्यप्रदेश का प्रथम संग्रहालय है, जिसमें इतनी अधिक संख्या में धान की किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। इस दौरान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ एन के बिसेन, डॉ घनश्याम देशमुख, डॉ उत्तम बिसेन, डॉ शरद बिसेन एवं महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक उपस्थित थे।
किसानों के प्रशिक्षण में हुए शामिल
    कलेक्टर डॉ मिश्रा मुरझड़ में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत किसानों को दिये जा रहे प्रशिक्षण में भी पहुंचे और किसानों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने किसानों से चिन्नौर की खेत में आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों से कहा कि प्रशिक्षण एक तरफा नहीं होना चाहिए, इसमें दोनों ओर से संवाद होना चाहिए। विशेषज्ञों की बातों को सुनने के साथ ही किसान उनसे सवाल करें और अपनी जिज्ञासा का समाधान करें। तभी प्रशिक्षण सार्थक सिद्ध होगा।

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