Ratlam:विश्व श्रवण दिवस पर जिला चिकित्सालय में 3 मार्च को शिविर आयोजित किया जाएगा
Last Updated: मार्च 2, 2024 " 06:52 अपराह्न"
रतलाम। बहरेपन और सुनने की क्षमता में कमी की समस्या के बारे में जागरूकता बढाने और दुनिया भर में कान औेर सुनने की देखभाल को बढावा देने के लिए प्रतिवर्ष 3 मार्च विश्व श्रवण दिवस के रूप में मनाया जाता है । अज्ञात श्रवण हानि रूग्णता का एक प्रमुख कारण है और देश के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए बड़ा खतरा है। यह उम्मीद की जाती है कि आने वाले दशकों में जनसांख्यिकीय बदलाव, ध्वनि प्रदूषण जैसे कारकों के बढ़ते जोखिम के साथ-साथ श्रवण हानि की व्यापकता में काफी वृद्धि होना संभावित है। साथ ही ओटाइटिस मीडिया (मध्य कान का संक्रमण) जैसे अनुपचारित कान की स्थिति का बने रहना जैसे अनेक कारण श्रवण हानि का कारण बनते हैं, उन्हें रोका जा सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. एम.एस. सागर ने बताया कि वर्ष 2024 के लिए विश्व श्रवण दिवस की मुख्य थीम ‘बदलती मानसिकता : आईये कान और श्रवण संबंधी देखभाल को सभी के लिए वास्तविक बनाएं’ निर्धारित की गई है । इस संबंध में नि:शुल्क जांच उपचार शिविर का आयोजन 3 मार्च को प्रातः 9:00 बजे से 2:00 बजे तक जिला चिकित्सालय रतलाम में किया जा रहा है। शिविर में अधिक से अधिक लोग उपस्थित होकर अपने कान एवं श्रवण रोग संबंधी समस्याओं का निदान एवं परामर्श प्राप्त कर सकते हैं ।
राष्ट्रीय बधिरता नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम की नोडल अधिकारी नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति भावसार ने बताया कि कान की देखभाल करना अत्यंत आवश्यक है। बहरेपन के प्रमुख कारणों में कान के संक्रमण, मवाद आना, कान का दर्द, कान में मैल, कान की दुर्घटनाएं, सिर या कान में चोट, बचपन की बीमारियां, खसरा, अत्यधिक शोर, हॉर्न, लाउडस्पीकर, तेज आवाज में संगीत, पटाखे, दवाइयां,जो श्रवण शक्ति को नुकसान पहुंचती है। गर्भावस्था में होने वाली समस्याएं जैसे कि रूबेला जर्मन मीजल्स, समय से पहले बच्चे का पैदा होना आदि है ।
कान शरीर का एक प्रमुख नाजुक अंग है , इस पर किसी भी स्थिति में चोट नहीं लगने देना चाहिए। बच्चा यदि कक्षा में अनमना रहे और ध्यान ना देता हो तो हो सकता है उसे कम सुनाई देता हो, बच्चों को कान में कुछ भी डालने से रोके, बच्चों को कभी कान पर ना मारे, किसी बच्चे का कान बहता हो या कम सुनता हो तो उसकी तुरंत डॉक्टरी जांच करना चाहिए। गंदे पानी में तैरने और नहाने से बचें । अस्वच्छ वातावरण में रहने से बचें, कान में नुकीली वस्तु डालने से बचे।