मामला धामनोद ट्रेचिंग ग्राउंड का: कम रेट पर किया टेंडर, घटिया निर्माण से उड़ रही धूल, उपयंत्री ने कार्रवाई की इतिश्री की पूरी-

  
Last Updated:  नवम्बर 3, 2024 " 02:30 अपराह्न"

“मुकेश चौधरी” रतलाम/धामनोद। नगरीय निकायों में विकास कार्य तेजी से हो ओर नागरिकों को समय पर सुविधाओं का लाभ मिल सके इस हेतु सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों में करोड़ों रुपए की राशि दी जा रही है , लेकिन धरातल पर धूल उड़ रही है, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के हावी होने से ना शासन की मंशानुरूप विकास कार्य हो रहे नाही नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं समय पर मिल रही है। आपको सुनकर यह ताज्जुब होगा कि लोग दस रुपये का काम पांच रुपये में करने के लिए बेताब हैं। यहां तक कि निविदा पाने के लिए प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से शासकीय पदों पर आसीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ ही साथ राजनीतिक लोग तक अपनी एड़ी-चोटी एक कर दे रहे हैं। निकाय में कुछ इसी तरह हो रहा है। 15 से 25 फीसद कम रेट पर काम करने के लिए ठेकेदार निविदा डाल रहे हैं और अधिकारी भी उसे आंख बंदकर अपनी मुहर लगा दे रहे हैं।

इस क्रम में सामने आ रही जानकारी के अनुसार निविदादाता 15 से 20 फीसद कम दर पर काम कराने के लिए तैयार हैं। यही नहीं, काम पाने के लिए जुगाड़ खोज रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि निर्धारित मूल्य से कम दर पर ठेकेदार गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कैसे करा सकेंगे। स्थिति साफ है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जाएगा। यह तो एक बानगी भर है, इसके अलावा निकाय की जितनी भी सड़कों, नाले, नालियां, भवन का निर्माण कराया जा रहा है, अधिसंख्य की निविदा कम रेट पर डाली गई है। अधिकारी भी कम रेट का समर्थन करते हुए निविदा को फाइनल कर दे रहे हैं।

यह है कम रेट का गणित-

ठेकेदारों के बीच हो रही प्रतिस्पद्र्धा और अधिकारियों के तालमेल से ठेकेदार अनुमानित लागत से कम पर टेंडर भरते हैं। निकाय में कम रेट पर काम होने का यह प्रतिशत एक या दो नहीं बल्कि 20 से 30 प्रतिशत तक रहा है। काम होने के बाद ठेकेदार करीब 20 फीसद राशि अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की हथेली गरम करने में खर्च कर देता है। स्टीमेट रेट का 40-45 फीसदी हिस्सा बिलो रेट और कमीशनखोरी में खर्च हो जाता है। अब ऐसे में ठेकेदार गुणवत्ता के साथ कैसे काम कर सकता है यह एक बड़ा सवाल है। निकाय की ज्यादातर सड़क, नाला, नालियां, भवन आदि का निर्माण कार्य बिलो रेट टेंडर पर कराया जाता है।

निविदा में एक तरह का कंपटीशन होता है। जो सबसे कम रेट पर काम करना चाहता है उसी को निविदा दी जाती है लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता है। इससे सरकार को लाभ मिलता है। निर्देश भी यही है कि जो सबसे कम पैसे में काम कराने के लिए तैयार हो उसी को निविदा दिया जाए। विभाग और संबंधित ठेकेदार के बीच तैयार अनुबंध में गुणवत्ता की शर्त रखी जाती है। इसके बाद भी गुणवत्ता की अनदेखी करने पर शिकायत मिलने पर अनुबंध निरस्त करते हुए जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। लेकिन नगर परिषद धामनोद में संबंधित अधिकारियों एवं जवाबदार जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता समझा जाए या ठेकेदारों से सांठ-गांठ? निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी करने पर पार्षदों द्वारा बार-बार शिकायते करने के बाद भी ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

निर्माण का कुछ हिस्सा तोड़ कर कार्रवाई की इतिश्री पूरी की

ताज़ा मामला 26 अक्टूबर को सामने आया है निकाय क्षेत्र में ट्रेचिंग ग्राउंड पर घटिया निर्माण मटेरियल से भवन निर्माण का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूर्ण कर दिया गया जहां पार्षदों ने औचक निरीक्षण किया और एक माह पूर्व निर्माण की गई दीवारों पर हाथ फेरते ही घटिया मटेरियल गीरने लगा , पार्षदों ने मौका पंचनामा भी बनाया। मिली जानकारी अनुसार जानकारी मिलने पर सीएमओ ने उपमंत्री को नोटिस जारी किया, वहीं उपयंत्री अभिषेक श्रीवास्तव ने खराब मटेरियल और निर्माण कार्य में खामी वाली दीवारों को गीराने को कहां और कार्रवाई की इतिश्री विभागीय तोर पर पूरी की। जिसके फलस्वरूप ठेकेदार ने दीवार के उपर से पृथक -पृथक लगभग दो फीट गिराकर निकाय के जवाबदारों के निर्देश को पालन करने की इतिश्री पूरी की। इस विषय में निकाय के उपयंत्री अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया की जो (defective) खामी थी वो तुड़वा दिया है। अब प्रश्न यह उठता है कि एक माह पूर्व भवन की दीवार का निर्माण हुआ था उक्त दीवार पर पार्षदों की उंगलियां लगते ही दरारों से धुल गीर रही जो साफतौर पर ठेकेदार द्वारा की गई अनियमितताएं तथा निकाय के उपमंत्री की लापरवाही की ओर इंगित होता है। निकाय के उपयंत्री द्वारा अपने कार्य में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है इसके पूर्व भी कई मामले ऐसे हैं जिसमें इनकी घोल लापरवाही सड़क, नाला, नालियों , दूकानों के निर्माण आदि में सामने आ चुकी है। जो धरातल पर देखी भी जा सकती हैं। लेकिन यह संयोग समझे या जवाबदारों से सांठ-गांठ, की अभी तक उपयंत्री पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।

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