MP कृषक कल्याण वर्ष-2026: हर विधानसभा में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान, छोटे किसानों को मिलेगी बड़ी राहत
Last Updated: जुलाई 23, 2026 " 09:21 पूर्वाह्न"
वर्तमान में 5260 केन्द्र संचालित, हर साल 1060 नई दुकानें जोड़ी जाएंगी। विदिशा बना कृषि यंत्र निर्माण का हब
भोपाल, (स्पष्ट खबर )।राज्य सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष-2026 में किसानों की सहूलियत के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) के निर्देश पर अब प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक “कृषि यंत्र किराये की दुकान” अनिवार्य रूप से खोली जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 5260 ऐसे केन्द्र संचालित हैं। नई योजना के तहत हर साल 1060 नई कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जाएंगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को न्यूनतम सेवा शुल्क पर आधुनिक यंत्र उपलब्ध हो सकेंगे।
आत्मनिर्भर बना मध्यप्रदेश प्रदेश अब कृषि यंत्रों के निर्माण में भी आत्मनिर्भर हो रहा है। विदिशा जिले ने इस दिशा में आदर्श उदाहरण पेश किया है। यहां ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रोलिक ट्रॉली, कल्टीवेटर, प्लाऊ जैसे उपकरण स्थानीय स्तर पर ही बनाए जा रहे हैं। जिले में लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं।
यहां निर्मित यंत्रों की मांग न केवल अन्य राज्यों बल्कि मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में भी है।
उद्यमियों को मिला बढ़ावा उषा एग्रो के मानस गुप्ता ने बताया, “हम लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर जैसे यंत्र बनाते हैं। पिताजी ने 1993 में छोटी इकाई से शुरुआत की थी। आज हमारे उपकरण 10 से अधिक देशों में जा रहे हैं। सालाना लगभग 4 करोड़ का कारोबार है।” उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियों और जी-20 सम्मेलन में मिली सहायता से निर्यात को बल मिला है।
संजय उद्योग के विष्णु शर्मा ने 2020 में कोरोना काल में शुरुआत की। “किसानों ने हमारे कल्टीवेटर और प्लाऊ को हाथों-हाथ लिया। सालाना 50 लाख का कारोबार है।”
किसान इंडस्ट्रीज के विपिन रघुवंशी और एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी के दीपक नरवरिया के अनुसार उनकी इकाइयों का सालाना कारोबार क्रमशः स्थानीय मांग और 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
युवाओं के लिए अवसर सरकार ने छोटे किसानों के साथ-साथ युवा उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। अधिकारियों का मानना है कि किराये की दुकानों और स्थानीय निर्माण से खेती की लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।