रतलाम/धामनोद:6 सितंबर, 2020(स्पष्ट खबर)| शनिवार को रतलाम जिले कि नगर परिषद धामनोद में यू तो साधारण सम्मेलन था लेकिन आवासीय भूखण्ड पट्टों का विषय एजेंडे में लिए जाने से नगर परिषद का साधारण सम्मेलन नागरिकों के लिये विशेष रुचि रखने वाला बन गया था , नगर परिषद के साधारण सम्मेलन में होने वाले फैसले को लेकर नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म था |
नगर परिषद का साधारण सम्मेलन नागरिकों के लिए क्यों बना खास?
धामनोद को नगर परिषद का दर्जा वर्ष 2010 में मिला है इसके पूर्व धामनोद ग्राम पंचायत हुआ करता था, जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत कार्यकाल में वर्ष 1995 से 2009 के बीच पूर्व ग्राम पंचायतों ने शासकीय भूमि पर अपात्र व्यक्तियों को आवासीय भूखण्ड पट्टे जारी किये जाने के साथ ही तत्कालीन समय के नाबालिगों के अलावा कई धनाठी परिवारों व्यक्तियों को भी भूखण्ड लाभ दिया गया जबकि आज नगर में कई पात्र एवं जरुरत मंद तथा गरीब परिवारों को कोई भूखण्ड प्लांट आवंटन नहीं किया गया, पूर्व ग्राम पंचायतों ने किस प्रकार शासन की किमती भूमि को लूटा या है यह इस बात से पता चलता है की सम्पन्न परिवारों में एक से अधिक आवासीय भूखण्ड पट्टे जारी किये गए, एसा भी मामला प्रकाश में है जहाँ पति – पत्नी को एक ही दिनांक में पृथक पृथक आवासीय भूखण्ड पट्टे जारी किया गया और आदि इस प्रकार के फर्जी एवं अपात्रों को भूखण्ड का लाभ दिया गया बड़ी संख्या में जारी किये गए ऐसे पट्टों पर इंगित है कि भाई भतीजावाद के साथ ही तत्कालीन जवाबदारों ने उपकृत होकर आवासीय भूमि की रेवड़ियां परोसी है|
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इन आवासीय भूखण्डों में से कई आज भी खाली है जिन पर कोई निर्माण नहीं हुआ है
जब की तत्कालीन ग्राम पंचायतों द्वारा जारी किये गए आवासीय भूखण्ड पट्टा प्रमाण पत्र पर स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है कि उक्त भूमि पर संबंधित को एक वर्ष में निर्माण करना है, लेकिन इनमें से कुछ भूखण्डों पर 10, 15, 20 तथा 25 वर्षों बाद भी मकान निर्माण नहीं हुआ है |
वहीं कुछ अपात्रों को दिये गये आवासीय भूखण्डों पर पशु तबेले, गोडाउन, आदि के उपयोग लिए जा रहे हैं तथा ऐसे भी कई मामले है जिनमें पूर्व ग्राम पंचायतों ने अपनी बपौती समझकर संबधितों को अनुदान में दिये भूखण्डों को बेच दिया है|
नगर परिषद 21 दिन में करेगा जांच-
परिषद के पदाधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार अभी ऐसे भूखण्डों का सम्पूर्ण सर्वे नहीं हुआ 21 दिन में नगर परिषद सर्वे कर फर्जी पट्टे, अपात्रों को दिये गये पट्टे, एक परिवार में एक से अधिक दिये गये पट्टों को निरस्त करने की कार्रवाई करेगा, लेकिन नगर परिषद सीएमओ लक्ष्मीकांत शर्मा ने दो वार्ड पार्षद प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्मेलन में हुएं निर्णय के बारें में कुछ अलग एवं हास्यास्पद , नियम विरुद्ध कार्य करने जैसी बात कही है , बैठक में हुएं निर्णय के बारे में नगर परिषद सीएमओ एवं नगर परिषद के पदाधिकारियों के बयान दोनों विपरीत है|
नगर परिषद सीएमओ द्वारा बैठक में उक्त विषय पर हुएं फैसले पर अपनी और से दी गई जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं इसका कारण यह है कि इस से नगर में भ्रामक जानकारी फैलाने के अलावा भष्ट्राचार को बढा़वा मिलेगा |
इनका कहना है-
रेवाशंकर राव उपाध्यक्ष नगर परिषद धामनोद
आवासीय पट्टों के मामले में कुछ का सर्वे किया है कुछ का छूट गया है तो सभी पार्षदों का कहना हैं कि पूरे नगर का सर्वे करलो और जो जो सर्वे में आये और अपात्र है उनको निरस्त किये जाएं, जिस पर साहब (सीएमओ) ने कहा है 20 दिन का टाइम दिया जा कर सर्वे करवा कर निरस्त किये जाऐंगे|
फर्जी एवं अपात्रों के भूखण्ड पट्टे निरस्त किये जाने है-
नेताप्रतिपक्ष सत्यनारायण पाटीदार
ने बताया कि आज बैठक में निर्णय हुआ है कि सर्वे में कुछ छूट गयें 21 दिन में सभी का सर्वे किया जाना है जिसमें फर्जी एवं अपात्र व्यक्तियों के पट्टे निरस्त किये जाने पर सहमति बनी हैं|
जांच अवधि 21 दिन के बाद चिन्हित पट्टे निरस्त होगें-
बद्रीलाल सिसोदिया पार्षद वार्ड क्रमांक, 12
बैठक में निर्णय लिया है कि 21 दिन में सभी आवासीय भूखण्ड पट्टों की जांच करना है और जो सर्वे में फर्जी व अपात्र पाएं जाता है उसे निरस्त किया जाएगा|
वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद प्रतिनिधि मदनलाल पाटीदार ने कहाँ की हमारी पार्षद ने बैठक में फर्जी एवं अपात्र पट्टों को निरस्त करने की बात रखीं है जरूरतमंद आवास के लिए भटक रहे और अपात्रों के पास अनुदान के एक से अधिक पट्टे सभी निरस्त की बात रखी है |
वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद प्रतिनिधि कमलेश शर्मा ने बताया कि सीएमओ साहब बैठक से बाहर कुछ और बोल रहे हैं और बैठक में कुछ और निर्णय हुआ है
पार्षद फर्जी पट्टों को निरस्त करने की पक्षधर है
तथा नियम अंतर्गत कार्रवाई होना चाहिए व आवासीय भूखण्डों के सर्वे भी इमानदार कर्मचारियों से करवावे जिन पर भष्ट्राचार के आरोप है उनको सर्वे दल में शामिल नहीं किया जाए|
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