बाल विवाह रोकथाम: MP सरकार ने ग्राम स्तर तक तय की जवाबदेही, पटवारी बने प्रतिषेध अधिकारी
Last Updated: मई 28, 2026 " 11:41 पूर्वाह्न"
बाल विवाह रोकथाम: MP सरकार ने ग्राम स्तर तक तय की जवाबदेही, पटवारी बने प्रतिषेध अधिकारी
भोपाल,(स्पष्ट खबर)। मध्यप्रदेश शासन ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। राज्य सरकार ने पूर्व अधिसूचना को निरस्त करते हुए जिला से ग्राम स्तर तक विभिन्न अधिकारियों को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” अधिसूचित किया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव पर जारी इस आदेश के तहत अब कलेक्टर से लेकर पटवारी तक सीधे जवाबदेह होंगे। अधिनियम की धारा 16 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में यह व्यवस्था बनाई गई है।
त्रि-स्तरीय से वृहद प्रशासनिक तंत्र
जिला स्तर: जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी। अनुभाग स्तर: अनुविभागीय अधिकारी राजस्व। तहसील स्तर: तहसीलदार एवं समस्त नायब तहसीलदार।
विकासखंड स्तर: जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी। सेक्टर स्तर: राजस्व निरीक्षक एवं महिला बाल विकास पर्यवेक्षक। ग्राम स्तर: पटवारी। नगरीय निकाय: नगर निगम के जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी तथा नगर पालिका एवं नगर परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक, मुख्य स्वच्छता निरीक्षक।
तत्काल कार्रवाई का प्रावधान नई व्यवस्था के अनुसार बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित क्षेत्र के पटवारी या सेक्टर पर्यवेक्षक को मौके पर हस्तक्षेप कर विवाह रुकवाने का विधिक अधिकार होगा। प्रकरण में तत्काल एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
राज्य शासन का मत है कि जमीनी स्तर तक जवाबदेही तय होने से विवाह सीजन में बाल विवाह के प्रकरणों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राजस्व विभाग के समन्वय से बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा एवं अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि इस विषय में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।