सोयाबीन बुवाई से पहले KVK शाजापुर की किसानों को अहम सलाह, 100 मिमी बारिश के बाद ही करें बुवाई

  
Last Updated:  जुलाई 1, 2026 " 08:06 अपराह्न"

शाजापुर, 1 जुलाई (स्पष्ट खबर)। कृषि विज्ञान केन्द्र शाजापुर ने खरीफ सीजन के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों हेतु महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। केन्द्र ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन की बुवाई मानसून आने और कम से कम 100 मिमी वर्षा होने के बाद ही करें। जुलाई का प्रथम सप्ताह बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है।

KVK के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश के लिए अनुशंसित उन्नत किस्मों जैसे JS-24-33, JS-21-72, JS-23-03, JS-23-09, NRC-150, NRC-165, NRC-157 आदि का प्रमाणित बीज ही उपयोग में लें। बुवाई से पूर्व बीज का फफूंदनाशक, कीटनाशक तथा ब्रेडीराइजोबियम/पीएसएम जैविक कल्चर से FIR क्रम में उपचार अवश्य करें। इससे फसल में रोग-कीट का प्रकोप कम होगा और पौध संख्या में सुधार होगा।

केन्द्र ने खेत की तैयारी पर भी जोर दिया है। किसानों को सलाह दी गई है कि खेत में 5 से 10 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें। बुवाई के समय 25:60:40:20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर का प्रयोग करें। साथ ही, जल निकास के लिए बुवाई के बाद 6 से 9 कतारों के अंतराल पर नालियां बनाना अनिवार्य बताया गया है। इससे अधिक वर्षा का पानी निकल सकेगा और सूखे की स्थिति में नमी संरक्षित रहेगी।

खरपतवार नियंत्रण के लिए KVK ने बताया कि बुवाई के तुरंत बाद मेटोलाक्‍लोर 35.98% + सल्‍फेंट्राजोन 11.5% या डायक्‍लोसुलम + पेण्‍डीमिथालीन का 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। यदि बुवाई के 10 दिन बाद खरपतवार दिखाई दें और पहले खरपतवारनाशी का प्रयोग न किया हो, तो अनुशंसित खरपतवारनाशी का फ्लैट-फैन या फ्लड-जेट नोजल से छिड़काव करें अथवा निंदाई-गुड़ाई करें।

जिन खेतों में अंकुरण कम हुआ है, वहां गैप फिलिंग या पुनः बुवाई कर उचित पौध संख्या बनाए रखने की सलाह दी गई है। कीट प्रबंधन के लिए खेत की मेड़ों या नालियों में गेंदा या सुवा की बुवाई करने को कहा गया है, जिससे हानिकारक कीट आकर्षित होकर नष्ट किए जा सकें।

कृषि विज्ञान केन्द्र शाजापुर ने किसानों से आग्रह किया है कि अधिक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए केन्द्र से संपर्क करें।

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