पंजाब नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का क्‍लीन स्‍वीप, खाता तक नहीं खोल सके BJP, SAD और AAP

  
Last Updated:  फ़रवरी 17, 2021 " 10:06 अपराह्न"

निकाय चुनावों में कांग्रेस का दबदबा

चंडीगढ़|देश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच पंजाब निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी को प्रचंड जीत हासिल हुई है। कुल 8 नगर निगमों में से कांग्रेस ने 6 पर अपना कब्‍जा जमा लिया है। भारतीय जनता पार्टी को कृषि कानूनों को लेकर किसानों के गुस्‍से का सामना करना पड़ा। बीजेपी अपना खाता तक नहीं खोल पाई। मुख्‍य विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के लिए चुनाव नतीजे बेहद निराश करने वाले हैं। वहीं, पहली बार निकाय चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह से नाकामयाब रही। 2015 में हुए पिछले निकाय चुनावों में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी। शिरोमणि अकाली दल को 813 और बीजेपी को 348 सीटें मिली थीं। दोनों दलों का गठबंधन 1161 सीटों पर जीता था।

पंजाब में 8 नगर निगम और 109 नगर पालिका-नगर परिषदों पर गत 14 फरवरी को चुनाव हुए थे। बुधवार को आए नतीजों में पूरी तरह कांग्रेस का दबदबा रहा। बठिंडा, होशियारपुर, कपूरथला, अबोहर, बटाला और पठानकोट नगर निगम में कांग्रेस जीत हासिल कर चुकी है। मोगा नगर निगम के नतीजे देर रात तक आने की बात कही जा रही है। हालांकि अब तक यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, आठवें नगर निगम मोहाली में 19 फरवरी को नतीजे आएंगे।

78 नगर पालिका कांग्रेस के खाते में, वोटों की गिनती जारी
दूसरी ओर, नगर पालिका और नगर परिषद की बात करें तो अब तक 88 सीटों के नतीजे सामने आ चुके हैं। इनमें से 78 पर कांग्रेस ने अपना कब्‍जा जमाया है। शिरोमणि अकाली दल को सिर्फ 5 सीटें मिली हैं जबकि अन्‍य के खाते में 10 सीटें गई हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी के प्रत्‍याशी जीत के लिए तरस गए हैं। दोनो दलों का खाता तक नहीं खुला है। बाकी बचीं सीटों पर देर शाम तक नतीजे आ जाएंगे। जीत से उत्‍साहित कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पूरे राज्‍य में जगह जगह ढोल नगाड़ों के साथ भंगड़ा कर रहे हैं, वहीं, बीजेपी, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के खेमे में सन्‍नाटा पसरा हुआ है। कार्यकर्ता रंग-गुलाल के साथ होली मनाते भी नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस सरकार के काम पर जनता ने लगा दी मुहर: अमरिंदर सिंह
गौरतलब है कि दो साल बाद वर्ष 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों से पहले नगर निकाय चुनावों में जिस तरह कांग्रेस का दबदबा दिखाई दे रहा है, उससे भविष्‍य का अंदाजा लगाया जा सकता है। जीत से खुश पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह का कहना है कि निकाय चुनाव के नतीजों ने उनकी सरकार की विकास नीतियों और कार्यक्रमों पर पूरी तरह से मोहर लगा दी है। साथ ही जनता ने विपक्षी दलों बीजेपी, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के जनविरोधी कामों को पूरी तरह से अस्‍वीकार कर दिया है। ऐसे नतीजे कभी भी पहले किसी भी पार्टी को नहीं मिले हैं।

अफसरों की वजह से मिली हार: हरसिमरत कौर
दूसरी ओर, निकाय चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करने वाले अकाली दल के सांसद हरसिमरत कौर ने अफसरों को इसका जिम्‍मेदार बताया है। उनका कहना है कि बूथ कैप्‍चरिंग, उत्‍पीड़न और हिंसा के बावजूद अकाली प्रत्‍याशियों ने जीत हासिल की है। अफसरों ने अकाली की जीत में रोड़ा अटकाया है। इतने संघर्ष के बाद मिली जीत यह बताती है कि वर्ष 2022 में अकाली सरकार बनने जा रही है। इसलिए इन कामों में शामिल रहे अफसरों को अपनी उल्‍टी गिनती शुरू कर लेनी चाहिए।

अकाली के गढ़ बठिंडा में 53 सालों में पहली बार बनेगा कांग्रेसी मेयर
कांग्रेस के लिए खुशखबरी यह है कि उसने 53 सालों में पहली बार बठिंडा नगर निगम में जीत हासिल की है। पहली बार यहां कोई कांग्रेसी मेयर बनेगा। अकाली दल के प्रत्‍याशी को यहां करारी हार का सामना करना पड़ा है। बता दें कि बठिंडा में पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का पैतृक गांव बादल है। यह इलाका अकाली दल का गढ़ माना जाता था पर इस बार कांग्रेस ने अरमानों पर पानी फेर दिया है।

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