मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल अवैध घोषित की-
Last Updated: अगस्त 27, 2021 " 05:57 अपराह्न"
ad
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल अवैध घोषित की-
भोपाल | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल को अवैध घोषित करते हुए पटवारियों से काम पर लौटने के लिए कहा था। इसी के साथ पिछले 18 दिन से चल रही पटवारियों की हड़ताल बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई पटवारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। पटवारी काम पर लौट आए हैं।
हड़ताल कर रहे पटवारियों को एक दिन पहले ही तहसीलदारों ने भी समर्थन दिया था। यह भी कहा था कि पटवारियों की मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो हड़ताल में शामिल होना पड़ेगा। इतना ही नहीं, सरपंच संघ, राजस्व निरीक्षक संघ और भारतीय किसान संघ ने भी समर्थन दे दिया था। प्रदेश भर के पटवारी गृह जिलों में तबादला करने, अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में तेजी लाने, ग्रेड पे बढ़ाने, वरिष्ठता प्राप्त पटवारियों को पदोन्नति देने, खाली पदों को भरने जैसी मांगें कर रहे हैं।
ad
कोरोना वैक्सीनेशन करण महाअभियान का किया था बहिष्कार
पटवारियों ने दो दिन तक चले कोरोना टीकाकरण महाभियान का बहिष्कार कर दिया था। यह अभियान 25 व 26 जुलाई को बड़े पैमाने पर किया गया था। इसमें लाखों लोगों को कोरोना से बचाव टीके लगाए गए हैं। प्रदेश भर में पटवारियों के 19 हजार से अधिक पद हैं। इनमें से 17 हजार पदों पर पटवारी काम कर रहे हैं। बाकी के पद खाली हैं, जिन्हें भरने की मांग पटवारी लगातार कर रहे हैं। इनका कहना है कि पद खाली होने के कारण उन्हें अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। शासन ने इस संबंध में उचित कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
बाढ़ प्रभावित जिलों में हड़ताल से परेशानी हुई
पटवारियों की हड़ताल के कारण ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों में लोगों को ज्यादा परेशान होना पड़ा है। यहां बाढ़ से हुए नुकसान के सर्वे में पटवारियों की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उसी समय पटवारियों की हड़ताल हुई और अनेक प्रभावित लोगों का नाम सर्वे सूची में नहीं जुड़ पाया। हालांकि प्रशासन ने सर्वे के लिए दूसरी टीमें लगाई थीं, लेकिन पटवारी द्वारा किए जाने वाला सर्वे ही मान्य होता है। सर्वे के तकनीकी बिंदुओं को वे ही अधिक समझते हैं और ठीक से नुकसान का आकलन कर पाते हैं।
हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट का आदेश नहीं आता तो पटवारियों को कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता था। अब ऐसी स्थिति नहीं बनेगी। सरकार को भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद पटवारियों की मांगों पर उचित कार्रवाई कर सूचित करना होगा।