संसद में पास हुआ कृषि कानून वापसी बिल, राहुल गांधी बोले- चर्चा से डरती है सरकार

  
Last Updated:  नवम्बर 29, 2021 " 04:22 अपराह्न"

नई दिल्ली। संसद में दोनों सदनों से कृषि कानून वापसी बिल पास होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया से बात कर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पहले हमने कहा था कि सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना होगा और आज इन कानूनों को निरस्त कर दिया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिना चर्चा के कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया गया। यह सरकार चर्चा करने से डरती है। 

राहुल गांधी ने आगे कहा कि सरकार जानती थी कि वह गलत है। उन्होंने कहा कि सरकरा खुद भ्रमित है। मोदी सरकार को लगता था कि वह किसानों और गरीबों की आवाज को दबा सकती है लेकिन अब यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भी कई मांगें हैं। एमएसपी पर गारंटी कानून और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग है। राहुल ने ये भी कहा कि पीएम मोदी ने अपनी गलती मानी और उनके फैसले से किसानों की मौत हुई। इसलिए मुआवजा दिया जाना चाहिए।

अधीर रंजन ने भी बोला सरकार पर हमला

वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सदन को चलने नहीं देने के लिए सरकार हम पर आरोप लगाती है। लेकिन कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 पेश किया गया और बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार ने कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया हो, लेकिन इसकी ‘मन की बात’ कुछ और है।

इसके अलावा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोकसभा में कृषि कानून वापसी बिल पास होने के बाद अब राज्यसभा में भी बिना चर्चा के ही सरकार इसे पेश करेगी। हम चाहते हैं कि कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 पर चर्चा हो। लेकिन लोकसभा में इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित कर वे सिर्फ यह साबित करना चाहते हैं कि वे किसानों के पक्ष में हैं।

दोनों सदनों से पास हुआ तीनों कृषि कानूनों की वापसी का बिल
पीएम मोदी के एलान के बाद तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर आज संसद के दोनों सदनों की मुहर भी लग गई। हालांकि, विपक्षचर्चा की मांग पर अड़ा था, लेकिन सरकार ने एक नहीं सुनी और कृषि कानूनों की वापसी का बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हो गया।

 495 total views

Facebook Comments

Related Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *