MP News: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ऐतिहासिक भोजशाला परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया
Last Updated: मार्च 22, 2024 " 02:08 अपराह्न"
भोपाल। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का छह सप्ताह के भीतर एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का सोमवार को निर्देश दिया। एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को हिन्दू वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं। जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक टीम ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया, हिंदू पक्ष के वकील श्रीश दुबे ने कहा, अभी चार याचिकाएं चल रही हैं सर्वे आज सुबह 6 बजे शुरू हुआ रिपोर्ट जल्द ही कोर्ट को सौंपी जाएगी।
ऐतिहासिक और सरकारी दस्तावेजों में यह जिक्र है कि भोजशाला, सरस्वती सदन है, जिसकी स्थापना राजा भोज ने की थी। यहां परमार वंश के राजा भोज ने 1010 से 1055 ईस्वी तक शासन किया था।
बताया जाता है कि राजा भोज ने 1034 में सरस्वती सदन की स्थापना की थी। यह एक कॉलेज था, जो आगे चलकर भोजशाला हो गया है। यहां शिक्षा हासिल करने दूर-दूर से लोग आते थे। राजा भोज के शासनकाल में ही यहां सरस्वती मां की मूर्ति स्थापित की गई थी, जिन्हें वाग्देवी भी कहा जाता है।
सरस्वती मंदिर : ऐतिहासिक और सरकारी दस्तावेजों में यह जिक्र है कि भोजशाला, सरस्वती सदन है, जिसकी स्थापना राजा भोज ने की थी। यहां परमार वंश के राजा भोज ने 1010 से 1055 ईस्वी तक शासन किया था।
बताया जाता है कि राजा भोज ने 1034 में सरस्वती सदन की स्थापना की थी। यह एक कॉलेज था, जो आगे चलकर भोजशाला हो गया है। यहां शिक्षा हासिल करने दूर-दूर से लोग आते थे। राजा भोज के शासनकाल में ही यहां सरस्वती मां की मूर्ति स्थापित की गई थी, जिन्हें वाग्देवी भी कहा जाता है।
कमाल मौला की मस्जिद : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का छह सप्ताह के भीतर एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का सोमवार को निर्देश दिया। एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को हिन्दू वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है।
मंगलवार को पूजा की व्यवस्था : एएसआई के सात अप्रैल 2003 को की गई एक व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।