धामनोद: फर्जी भूखंड पट्टों को आधार बनाकर किया बडा़ भूमि घोटाला-

  
Last Updated:  जून 25, 2020 " 02:30 पूर्वाह्न"

दो साल आगे का भविष्य देखने वाले दिव्य दृष्टि सरपंच से लेकर , तथाकथित नगर परिषद कर्मचारी संदेह के घेरे में-

मुकेश चौधरी

रतलाम/धामनोद:25 जून 2020(स्पष्ट खबर)| करोड़ों की शासकीय भूमि पर फर्जी भूखंड पट्टे के मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत सरपंच से लेकर पूर्व नगर परिषद एवं वर्तमान नगर परिषद के जवाबदारों के हाथ कोयले की दलाली में काले है ,
काला अंधियारा कितना भी गहरा क्यो ना हो प्रकाश की एक किरण के साथ समाप्त होने में समय नहीं लगता हैं |
मामला मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की धामनोद नगर परिषद से संबंधित होकर करोड़ों की शासकीय भूमि को फर्जी भूखंड पट्टों के आधार पर बंदरबांट कर दिया गया है
जहाँ पूर्व ग्राम पंचायत सरपंच के हस्ताक्षर मोहर लगें फर्जी भूखंड पट्टों के आधार पर अपात्र लोगों ने शासकीय भूमि पर कब्जा किया और नगर परिषद ने फर्जी भूखंड पट्टों की बीना उचित जाचं के फर्जी भूखंड पट्टों को तथाकथित लोगों के नाम से अपने अचल संपत्ति कर रिकॉर्ड में दर्ज कर उनको अवैध से वैध कर जहाँ शासन की करोड़ों ₹ मूल्य की बेशकीमती भूमि को बाप की बपौती समझ कर लुटाया है तथा पात्र गरीब जरूरतमंदों को खुद के मकान से वंचित कर निर्दयता पूर्ण शोषण किया गया है|

वर्ष 2005 से 2009 की ग्राम पंचायत से लेकर वर्ष 2010 से वर्तमान नगर परिषद तक के काले हाथ-

नगर परिषद से प्राप्त रिकॉर्ड अनुसार तत्कालीन ग्राम पंचायत ने 86 आवासीय भूखंड पट्टे जारी किये गए थे,

तत्कालीन ग्राम पंचायत द्वारा 86 भूखंड पट्टे देने का रिकॉर्ड नगर परिषद धामनोद के पास है
लेकिन नगर में वर्ष 2005 से 2009 तक की दिनांक के कई अन्य भूखंड पट्टे तत्कालीन ग्राम पंचायत सरपंच दयाराम खराड़ी के हस्ताक्षर मोहर लगे प्रकाश में आये है हमारे द्वारा पडताल में जुटाए गये सबूतों एवं विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है की उक्त पट्टों में बड़ी संख्या में फर्जी भूखंड पट्टे है जिन्हें तथाकथित अपात्र लोगों के नाम पर नगर परिषद के अंचल संपत्ति कर रिकॉर्ड में दर्ज किया गया जाकर इनमें कुछ ऐसे भी है जिनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया है,
गौर करने वाली बात है की नगर परिषद के अचल संपत्ति रिकॉर्ड में फर्जी एवं अपात्र लोगों के भूखंड प्लाट दर्ज कि ये गये हैं लेकिन तत्कालीन ग्राम पंचायत ने जारी कि ये गए 86 आवासीय भूखंड पट्टों में से कई आज दिनांक तक नगर परिषद के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है,
जिससे पात्र एवं गरीब लोग प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठाने से वंचित होकर कच्चे मकानों में निवास रत है,
इस विषय में अगर शासन प्रशासन द्वारा उच्च स्तरीय अधिकारीयों से जांच करवाईं जाये तो भूतपूर्व ग्राम पंचायतों एवं वर्तमान नगर परिषद कर्मचारी द्वारा करोड़ों की शासकीय भूमि को अपात्रों को फायदा पहुंचा कर चांदी काटने फर्जीवाड़ा निकल कर सामने आएगा |

लालू, सविताबाई, गोपाल जी, एवं अमरीबाई मामला गड़बड घोटाला-

दीनदयाल नगर में लालू पिता ब्रदिलाल पाटीदार एवं सविताबाई पति लालूजी के नाम पर संदेहास्पद दो भूखंड है जिनके पट्टे इनके नाम पर पृथक- पृथक होकर भूखंड पर कब्जे के नाम पर खाली प्लाट है
यहा गौर किया जाए कि लालू एवं सविता पति पत्नी है और पति पत्नी को पृथक पृथक आवासीय भूखंड पट्टे देने का औचित्य ही नहीं है
हालांकि उक्त रिकॉर्ड के अनुसार इनके पट्टे 86 पट्टों की लिस्ट में नहीं है लेकिन सूत्र बताते हैं की इनका भूखंड नगर परिषद रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है,
जबकि इनके भूखंड पट्टों पर पट्टे जारी करने की एक ही दिनांक 15/05/2007 है
कमाल तो यह है कि लालू के भूखंड पट्टे की चतुर्थ सीमा में पूर्व में सविताबाई के प्लाट का जिक्र किया है तो सविताबाई के भूखंड पट्टे की चतुर्थ सीमा में पूर्व में गोपालजी आदिवासी, तो पश्चिम में लालू का प्लाट होना दर्शाया गया है
अब यहाँ गौर किया जाए की इन दोनों भूखंड पट्टों के कब्जे वाले स्थान पर आस पास किसी भी सीमा में कोई गोपालजी आदिवासी नहीं है लालू पिता बद्रीलाल पाटीदार एवं लालू की पत्नी सविताबाई पति लालू पाटीदार दोनों के भूखंड पट्टे फर्जी साबित होने को लेकर पुख्ता दस्तावेज में अहम सबूत है की सविताबाई पति लालू के भूखंड पट्टे में जिस गोपालजी आदिवासी का उल्लेख है उनके नाम से कोई प्लाट नहीं होकर इनके पत्नी अमरीबाई के नाम का एक भूखंड पट्टे की जानकारी सबूत मिले हैं तथा अमरीबाई द्वारा उक्त भूमि पर झोपड़ी बनाकर निवास भी किया जा रहा है ,
अब इन तीनों भूखंड पट्टों को जारी करने की दिनांक पर आए तो लालू पिता बद्रीलाल एवं सविताबाई पति लालू के पट्टे पर एक ही दिनांक 15/05/2007 दर्ज हैं जबकि अमरीबाई पति गोपालजी आदिवासी के पट्टे की जारी होने की दिनांक 07/07/2009 है जिस से यह साबित होता है कि लालू एवं सविताबाई दोनों पति पत्नी के भूखंड पट्टे बिना रिकॉर्ड की जानकारी के बने होने के कारण चतुर्थ सीमा में अमरीबाई का नाम दर्शाने की जगह जानकारी के अभाव में इनके पति के नाम का उल्लेख कर दिया गया तथा इन तथाकथित फर्जी जरूरतमंद गरीबों को दिनांक 15/05/2007 को भूखंड पट्टे जारी करने वाले ने दो वर्ष आगे का दिनांक 07/07/2009 का भविष्य देख कर चतुर्थ सीमा का उल्लेख कर दिया है , वहीं इनके पट्टे जारी होने एवं ग्राम पंचायत में इनको पट्टे देने पर प्रस्ताव पारित होने की भी एक ही दिनांक है जिससे पता चलता है कि तत्कालीन ग्राम पंचायत के प्रस्तावित कार्य कितनी रफ्तार से होते थे|

लालू पिता बद्रीलाल पाटीदार
सविताबाई पति लालू पाटीदार
अमरीबाई पति गोपाल आदिवासी

इस विषय में हमारे द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी लक्ष्मीकांत शर्मा को प्रमाणित सबूत , तथ्य जांच हेतु दिये गये हैं
जिस पर श्री शर्मा द्वारा सभी पट्टों की जांच करने का कहा गया है तथा यह भी कहाँ हैं की नगर परिषद रिकॉर्ड में फर्जी पट्टे दर्ज हुए हैं तो वह भी निरस्त हो सकते हैं| अब देखना होगा की आईने की तरह स्पष्ट सबूतों के आधार पर नगर परिषद सीएमओ कार्रवाई करते हैं या राजनीति के दबाव में सच्चाई का गला घोंट कर अवैध को वैध एवं वैध को अवैध करने में कोयले की दलाली में काले हाथ|

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