रोती रही मां, पाकिस्‍तानी कोर्ट ने 13 साल की ईसाई बच्ची को किडनैपर ‘पति’ संग भेजा

  
Last Updated:  नवम्बर 2, 2020 " 11:34 पूर्वाह्न"

कराची (पाकिस्तान)|पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। हाल की एक घटना में सिंध प्रांत में 13 साल की बच्ची का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कर दिया गया। फिर 44 साल के शख्स से शादी कर दी गई। इस मामले में पाकिस्तान की अदालत ने भी बच्ची को अपहरणकर्ताओं के साथ भेजने और मामले में कोई गिरफ्तारी न करने का आदेश दे दिया।

इस नाइंसाफी के बाद बच्ची और उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। मां के बिलखने का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 13 साल की आरजू रजा ईसाई धर्म की है। उसके पिता का कहना है कि कराची के घर से उसका अपहरण किया गया। दो दिन बाद पुलिस ने संपर्क कर कहा कि 44 साल के एक शख्स से आरजू की शादी हो गई है।

मां रीता मसीह अपनी बच्ची से मिलने की गुहार लगाती रहीं
उस शख्स ने मैरिज सर्टिफिकेट दिखाया और कहा कि उसने धर्म परिवर्तरन कर लिया है। सर्टिफिकेट में आरजू की उम्र 18 साल दिखाई गई है जबकि परिवार को कहना है कि वह महज 13 साल की है। रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान आरजू अपनी मां के पास भागकर पहुंचना चाहती थी लेकिन उसके पति ने कसकर उसका हाथ पकड़ा हुआ था।

इस कार्रवाई के दौरान आरजू की मां रीता मसीह अपनी बच्ची से मिलने की गुहार लगाती रहीं। सोशल मीडिया पर सामने आए विडियो में देखा गया कि रीता अपने बच्चों की दुहाई देते हुए बेटी को देखनी मांग कर रही हैं और यह कहते हुए वह बेहोश हो जाती हैं लेकिन उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया जाता।

धर्म परिवर्तन के लिए बदनाम है सिंध
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए बदनाम सिंध में यह पहली घटना नहीं है। जून के अंतिम हफ्ते में आई रिपोर्ट के अनुसार, सिंध प्रांत में बड़े स्तर पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें मुस्लिम बनाए जाने का मामला सामने आया था। सिंध के बादिन में 102 हिंदुओं को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक इन लोगों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल थे।

हर साल 1000 से ज्यादा लड़कियों का धर्म परिवर्तन
मानवाधिकार संस्था मूवमेंट फॉर सॉलिडैरिटी एंड पीस (MSP) के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल 1000 से ज्यादा ईसाई और हिंदू महिलाओं या लड़कियों का अपहरण किया जाता है। जिसके बाद उनका धर्म परिवर्तन करवा कर इस्लामिक रीति रिवाज से निकाह करवा दिया जाता है। पीड़ितों में ज्यादातर की उम्र 12 साल से 25 साल के बीच में होती है।

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