लाल क‍िला: जहां शान से लहराता है तिरंगा, वहां किसानों ने फहराया अपना झंडा, शशि थरूर भी भड़के

  
Last Updated:  जनवरी 26, 2021 " 05:40 अपराह्न"

नई दिल्‍ली|हर साल स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्‍ट्रध्‍वज फहराते हैं। इस ऐतिहासिक इमारत की उसी प्राचीर पर गणतंत्र दिवस के दिन कोई और झंडा फहर रहा था। वजह यह थी कि कुछ प्रदर्शनकारी किसान सरकार को संदेश देना चाहते थे। ट्रैक्‍टर रैली में पर्याप्‍त हुड़दंग मचाने के बाद जब किसानों का जत्‍था लाल किले पहुंचा तो मानों यहां बवाल चरम पर पहुंच गया। कुछ उपद्रवी लाल किले की प्राचीर पर चढ़ गए। ठीक उसी जगह अपना झंडा फहरा दिया जहां हर साल तिरंगा फहराया जाता है। ये वही जगह है जहां खड़े होकर हर साल प्रधानमंत्री राष्‍ट्र के नाम संदेश देते हैं। संदेश तो आज भी दिया गया है, मगर यह संदेश किसी लिहाज से ठीक नहीं है। इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर भी झंडे लगा दिए।

कुछ किसानों की इस हरकत की हो रही आलोचना
लाल किले की प्राचीर पर कोई और झंडा फहरता देख लोग हैरान रह गए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया है, “सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण। मैंने शुरुआत से किसानों के प्रदर्शन का समर्थन किया है लेकिन मैं अराजकता की अनदेखी नहीं कर सकता। गणतंत्र दिवस के दिन कोई और झंडा नहीं, केवल तिरंगा ही लाल किले पर फहरना चाहिए।” कांग्रेस के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍त जयवीर शेरगिल ने भी यही बात कही। बीजेपी नेता रमेश नायडू ने लिखा, “दिल्‍ली की सीमाओं से शुरू हुई भीड़ ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़े, तलवारें लहराईं। यहां तक कि हमारे सुरक्षा बलों के प्रतिरोध के बावजूद लाल किले तक पहुंच गए।”

संयुक्त किसान मोर्चा ने हिंसा से किया किनारा

किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा ने बेकाबू हुई ट्रैक्टर रैली में हिंसा से किनारा कर लिया है। नेताओं का कहना है कि जिन किसान संगठनों के लोग हिंसा पर उतर आए हैं और लाल किला परिसर में दाखिल हुए हैं, उनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है। ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मौला ने आईएएनएस से कहा कि कुछ संगठनों ने ट्रैक्टर रैली में घुसकर किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की है। ऑल इंडिया किसान सभा के पंजाब में जनरल सेक्रेटरी मेजर सिंह पुनावाल ने बताया कि जो लोग लाल किला पहुंचे हैं वे संयुक्त किसान मोर्चा के लोग नहीं हैं। पंजाब के ही किसान नेता और किसान बचाओ मोर्चा के अध्यक्ष कृपा सिंह ने कहा कि उत्पात मचाने वालों से उनका कोई संबंध नहीं है।

लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों का लेना पड़ा सहारा
हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी में पैदल और ट्रैक्टर पर सवार होकर घुस गए हैं। अर्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ट्रैक्टर रैली और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्के लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने तीन राज्यों दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और पुलिस के साथ समझौते को दरकिनार कर दिया है।


तय रूट और समय को धता बताकर आगे बढ़ गए किसान
ट्रैक्‍टर परेड निकालने के लिए जो रूट और समय तय किए गए थे, किसान उसे दरकिनार कर समय से पहले टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर लगे बैरीकेड को तोड़ते हुए राष्ट्रीय राजधानी की सीमा में प्रवेश कर गए। आईटीओ के पास पहुंचे किसानों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी दागे गए। सिंघु बॉर्डर से जो ट्रैक्टर रैली में किसानों की जो टुकड़ी चली थी वह भीतरी रिंग रोड की तरफ बढ़ गई और गाजीपुर बॉर्डर वाली टुकड़ी आईटीओ की तरफ बढ़ गई।

Red-Fort-Images

लाल किले पर फहराया गया अलग झंडा।

 2,721 total views

Facebook Comments

Related Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *