सैलाना के मुख्य जल स्त्रोत सूखे,, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण सैलाना में जल संकट-

  
Last Updated:  जुलाई 8, 2021 " 04:42 अपराह्न"

रतलाम/सैलाना| नगर परिषद अध्यक्ष नम्रता- जितेन्द्र सिह राठौर ने नगर की जल वितरण व्यवस्था की स्थिति पर प्रेस नोट जारी कर इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि नगर के दोनों मुख्य पेयजल स्त्रोत सूख चुके हैं। फिलहाल नगर परिषद जैसे तैसे अपने स्तर से प्रयास करके पेयजल उपलब्ध करा रही है। नागरिकों को इस समस्या को ध्यान में रखकर पेयजल किफायत से इस्तेमाल करे तथा कुछ दिनों तक घरेलू उपयोग के लिए नगर परिषद द्वारा गली मोहल्लों वार्डों में की गई व्यवस्था के तहत पानी ले एल
श्रीमती राठौर के जारी बयान में नगर परिषद अध्यक्ष ने सिलसिलेवार जानकारी देते हुए बताया कि परिषद के नगर में जल वितरण के दो मुख्य जल स्त्रोत है। दोनों पर ही मालिकाना हक सिंचाई विभाग का है। एक तो गोवर्धन सागर तालाब और दूसरा शिकार गाड़ी तालाब। दोनों ही स्त्रोतों से अनुबंध के तहत नगर के लिए पेयजल लिया जाता है। इन स्त्रोतों से पानी की एवज में सिंचाई विभाग को नगर परिषद प्रतिवर्ष लाखों रुपए का भुगतान करती है।

अधिकारियों का असयोगात्मक रवैया-

नगर परिषद अध्यक्ष ने कहा कि दरअसल शिकारवाडी तालाब में से तो दिसंबर तक ही नगर परिषद पेयजल ले पाई और वह सूख गया। जनवरी से नगर परिषद गोवर्धन सागर तालाब से पेयजल ले रही थी। अधिकारियों को हर बार समय पर ही अवगत करा दिया जाता है कि नगर में पेयजल हेतु 20 mcft पानी की आवश्यकता है, और उतने ही पानी का अनुबंध कर विभाग को निर्धारित राशि दी जाती है। जबकि नगर में 15-16 mcft ही पेयजल दोनों तालाबो से लिया जाता है। परंतु चिंता जनक बात यह है कि सिंचाई विभाग हर बार अनुबंध का ध्यान नहीं रखती है और सुप्रीम कोर्ट के साफ-साफ निर्देश होने के बावजूद भी
विभाग किसानों को सिंचाई के लिए ज्यादा पानी देकर नगरवासियों के कंठ सूखे रख रही है। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि इंसानों के लिए पेयजल सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए। नगर परिषद अध्यक्ष ने इस बात पर भी गहरी आपत्ति व्यक्त की है कि गोवर्धन सागर तालाब एक नहर तालाब है। इस तालाब से नहरो से तो खेतो में पानी दिया ही जाता है, परंतु इसके अतिरिक्त भी सिंचाई विभाग 30-35 किसानों से अनुबंध करके अलग से 4 से 5 माह पानी भी देती है। उधर विद्युत वितरण कंपनी भी इस संकट काल में अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। बार-बार की बिजली की आंख मिचोली से पेयजल व्यवस्था कई बार चरमराने की कगार पर पहुंच जाती है।

गोवर्धन सागर तालाब सूखा-

अब यह स्थिति पैदा हो गई है कि गोवर्धन सागर तालाब भी सूख गया है। और यदि अच्छी बरसात आजकल से शुरु हो जाती है तो भी कम से कम दो से तीन सप्ताह पूरी व्यवस्था सुधारने में लगेगें। नगर परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पूरे नगर की 15-16 हजार की आबादी के साथ ही हमें सभी शासकीय विभागो, उपजेल और गौशाला तक में पेयजल देना होता है। इस जिम्मेदारी को हम पूरे वर्ष तन्मयता से पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व 2018-19 में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई थी। तब भी जैसे तैसे व्यवस्था बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि बुधवार को तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई की गोवर्धन सागर तालाब के सूख जाने से तालाब की मछलियों के प्राण संकट में आ गए। मत्स्य पालन विभाग ने बुधवार को हजारों मछलियों को सरोज सरोवर धोलावाड़ तालाब में शिफ्ट किया। फिर भी हजारों मछलियों के प्राण जा चुके हैं। अधिकारियों का यदि सहयोगात्मक रवैया होता तो ये स्थिति निर्मित नहीं होती, विभागीय तालमेल की कमी के कारण उत्पन्न हुई और सहज ऐसा थी पानी की समस्या को लेकर वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को भी अवगत कराया है साथ ही उन से अनुरोध भी किया है कि शीघ्र ही सैलाना नगर की पेयजल की समस्या दूर करने हेतु उचित दिशा निर्देश संबंधित अधिकारियों को देवें।।

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