अमृत मिशन की परियोजनाओं में लापरवाही पर 5 संविदाकार काली सूची में दर्ज

  
Last Updated:  अगस्त 14, 2026 " 07:04 अपराह्न"

“जनहित की परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब और शिथिलता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं” – आयुक्त श्री भोंडवे

भोपाल,(स्पष्ट खबर)। आयुक्त संकेत भोंडवे से कहा कि “अमृत मिशन(AMRUT Mission) की परियोजनाएं सीधे आमजन की मूलभूत सुविधाओं एवं जनस्वास्थ्य से आच्छादित हैं। इनके क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब, स्वीकृत कार्ययोजना से विचलन अथवा अनुबंधीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।” आयुक्त संकेत भोंडवे ने अमृत मिशन की अल्प प्रगति वाली परियोजनाओं की समीक्षा में कही। श्री भोंडवे की अध्यक्षता में 13 अगस्त को संचालनालय के सभाकक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों एवं संविदाकारों का पक्ष सुनते हुए, जारी सूचना पत्रों (कारण बताओ नोटिस), प्रतिवेदनों एवं अभिमतों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। तदुपरांत कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने पर 05 निर्माण एजेंसियों (संविदाकारों) को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) करने का कड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया।

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समीक्षा में जिन 05 संविदाकार फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, उनमें नगर पालिक निगम भोपाल की ‘अमृत 2.0’ सीवरेज परियोजना (पैकेज-2) के लिए मेसर्स जयवरूदी इंफ्राकॉन प्रा. लि. तथा (पैकेज-3) के लिए मेसर्स एल.सी. इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि., नगर पालिक निगम देवास की ‘अमृत 2.0’ सीवरेज परियोजना के लिए मेसर्स दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्रा. लि., नगर पालिक निगम सतना की ‘अमृत 1.0’ सीवरेज परियोजना (पैकेज-2) के लिए मेसर्स इनविराड प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. एवं नगर पालिका परिषद पीथमपुर की ‘अमृत 2.0’ सीवरेज परियोजना के लिए मेसर्स आर. एण्ड बी. इंफ्रा प्रोजेक्ट लि. शामिल हैं।

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आयुक्त श्री भोंडवे ने स्पष्ट किया कि काली सूची में दर्ज किए जाने की अवधि के दौरान इन फर्मों की किसी भी नवीन निविदा, प्रस्ताव अथवा बोली को नगरीय प्रशासन विभाग एवं इसके अधीनस्थ निकायों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संबंधित नगरीय निकायों को अनुबंध की शर्तों के अनुसार आवश्यक दंडात्मक संविदात्मक कार्रवाई निष्पादित करने तथा जनहित में अवशेष कार्यों को बिना किसी व्यवधान के नियमानुसार शीघ्र पूर्ण कराने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग द्वारा अमृत मिशन की परियोजनाओं की सतत एवं उच्चस्तरीय समीक्षा जारी रहेगी और उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए भविष्य में भी ऐसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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