जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल राज्यसभा से पास, 2 साल की देरी पर अब कोर्ट के आदेश से ही होगा रजिस्ट्रेशन
Last Updated: अगस्त 4, 2026 " 10:37 अपराह्न"
जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल राज्यसभा से पास, 2 साल की देरी पर अब कोर्ट के आदेश से ही होगा रजिस्ट्रेशन
नई दिल्ली, (स्पष्ट खबर)। संसद ने जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को और पुख्ता करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा ने मंगलवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026’ ध्वनि मत से पारित कर दिया। इससे पहले 31 जुलाई को यह बिल लोकसभा में पास हो चुका था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।
विपक्ष के हंगामे के बीच पास हुआ बिल बिल पेश होते ही विपक्षी दलों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मुद्दे पर भी नारे लगे।
राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद दोपहर 2 बजे फिर शुरू हुई। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिल पर विचार और इसे पास कराने का प्रस्ताव रखा। शोर-शराबे के बीच चर्चा हुई और मंत्री ने जवाब भी दिया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि “सदन ठीक से काम नहीं कर रहा। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आकर चर्चा करनी चाहिए। हम चर्चा चाहते हैं।” NDA के कई सदस्यों ने बिल का समर्थन करते हुए इसे जरूरी बताया।
पुराने कानून में क्या बदला? सरकार ने स्पष्ट किया कि एक साल तक के पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नए प्रावधान इस प्रकार हैं:
21 दिन के अंदर: पहले की तरह सामान्य रूप से रजिस्ट्रेशन होगा। कोई शुल्क नहीं।
21 दिन से 1 साल तक: तय विलंब शुल्क देकर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा।
1 साल से 2 साल तक: अब जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट यानी SDM या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी की लिखित अनुमति जरूरी होगी। अनुमति से पहले अधिकारी को दिए गए दस्तावेजों और जानकारी की पूरी जांच करनी होगी।
2 साल से अधिक: इस स्थिति में अब केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जन्म या मृत्यु का पंजीकरण हो सकेगा। बिना कोर्ट के आदेश के प्रमाणपत्र नहीं बनेगा।
सरकार ने क्यों जरूरी बताया? बिल पर जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि मोदी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश में पैदा होने वाले हर बच्चे का पंजीकरण हो और हर मौत का रिकॉर्ड रखा जाए।
उन्होंने कहा “समय पर जन्म दर्ज होना जरूरी है क्योंकि इसी आधार पर बच्चे को शिक्षा, पहचान पत्र, सरकारी योजनाओं और अन्य कानूनी अधिकारों का लाभ मिलता है। इसी तरह मृत्यु का सही रिकॉर्ड प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अहम है।”
मंत्री ने आगे कहा कि इस कानून से “घोस्ट वोटर” की समस्या पर भी रोक लगेगी और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली पार्टियों को फायदा नहीं पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि “कांग्रेस ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण के जरिए इस देश को धोखा दिया है।”
बिल का उद्देश्य इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ के नियमों को सख्त बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे डेटा की शुद्धता बढ़ेगी और फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगाम लगेगी।
आपके लिए जरूरी बात पूरे देश में अब अगर किसी बच्चे का जन्म 2 साल बाद रजिस्टर कराना है तो माता-पिता को सीधे कोर्ट जाना होगा। 1 से 2 साल के बीच है तो DM या SDM ऑफिस से अनुमति लेनी पड़ेगी। इसलिए जन्म के 21 दिन के अंदर ही रजिस्ट्रेशन कराना सबसे आसान रहेगा।