रक्षाबंधन पर 10 ग्राम कम मिठाई देने वाले फर्म पर विभाग ने 5 हजार रुपए का लगाया था जुर्माना
Last Updated: सितम्बर 10, 2026 " 06:41 अपराह्न"
Indore:नापतौल विभाग द्वारा 100 रुपए से 50 लाख रुपए तक लगा सकता है जुर्माना- नापतौल विभाग
इंदौर 10 सितम्बर (स्पष्ट खबर)। संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने आज नापतौल विभाग के कार्यों और अब तक की गई कार्यवाहियों की समीक्षा की। विभाग द्वारा बताया गया कि अप्रैल माह से अब तक 175 प्रकरण बनाए गए है। इसमें रक्षाबंधन एवं अन्य त्योहारों के दौरान विभाग द्वारा तत्परता से कार्य किया गया। विभाग द्वारा निर्धारित मात्रा से कम गैस सप्लाई करने पर कार्यवाही की गई। ऑनलाइन शॉपिंग व्यापार के बिग बास्केट द्वारा एमआरपी से अधिक चार्ज करने पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसी तरह रक्षाबंधन के दौरान अधिकांश प्रकरण सामने आए है। इसमें 10 ग्राम मिठाई कम देने पर फर्म पर 5 हजार का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर अधिक चार्ज करने के मामले में 25 हजार का जुर्माना लगाया गया। बैठक में उपनियंत्रक संजय पाटणकर, नापतौल निरीक्षक खेमराज चौधरी, कपिल कदम सहित के. एस. ठाकुर, शरद शर्मा एवं एम.एम. राजपूत उपस्थित रहें।
बैठक में संभागायुक्त श्री लाक्षाकार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर एक व्यवस्थित विभागीय रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के पूरे विस्तार को समझें और उसके उपरांत ही योजना तैयार करें। इसके अलावा उन्होंने शॉपिंग मॉल्स में खाद्य पदार्थों के बिकने वाली वस्तुओं की पैकिंग का सत्यापन प्राथमिकता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि नापतौल विभाग द्वारा पहली बार में नोटिस और सुधार के लिए समय दिया जाता है। इसके बाद 1 लाख रुपए तक का जुर्माना। श्रद्धालुओं के साथ इस तरह से धोखा नहीं हो। ऐसे स्पॉट चिन्हांकित करें जहां अस्थायी दुकानें लगने की गुंजाइश है।
बैठक में नापतौल विभाग के विभागीय अधिकारियों द्वारा बताया गया कि नए नियम के बाद विभाग 100 रुपये से 50 लाख रूपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही सीजेएम कोर्ट में प्रकरण एडीपीओ की तरफ से लगाये जाते है। ऐसे प्रकरण राजीनामे के 6 माह बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाते है। जांच के दौरान लिये गए नमूनों की लैब में जांच की जाती है। एमआरपी से अधिक के मामलों की पड़ताल की जाती है। नापतौल विभाग द्वारा 12 माह में इलेक्ट्रॉनिक विंग मशीन (ईडब्ल्यूएम) और 24 माह में बाट की जांच करते है।