कृषकों के जल कर बकाया में कुछ तों संबंधित अधिकारी की भी मनमानी है,
Last Updated: फ़रवरी 2, 2020 " 05:27 पूर्वाह्न"
रतलाम,02फरवरी, 2020 (स्पष्ट खबर)। जल संसाधन विभाग व्दारा निर्मित जलाशय ( तालाबों) के कमाण्ड क्षेत्र में आने वाली कृषि भूमि के रकबे में सिंचाई हेतु जल प्रदाय किया जाता हैं। जिसके फलस्वरूप कृषकों व्दारा सिंचाई जलकर दिया जाना प्रावधानित हैं। जिसमें जल संसाधन विभाग का मानना है की, 2019- 2020 में वर्तमान स्थिति में अधिकतर कृषकों व्दारा जलकर की बकाया एवं चालू मांग की राशि विभाग में जमा नहीं की गई है। विभाग व्दारा दावा किया जा रहा है कि कृषकों की मांग के अनुरूप सिंचाई हेतु समय -समय पर जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस संबंध में कमाण्ड क्षेत्र के सिंचाई हेतु जल उपयोगकर्ता कृषकों को के लिए जल संसाधन विभाग रतलाम व्दारा सार्वजनिक सूचना -पत्र जारी कर संबंधित कृषकों को आग्रह किया है कि वे अपनी जल कर की राशि शीघ्र विभाग में जमा कर रसीद प्राप्त कर लेवे अन्यथा सिंचाई अधिनियम के तहत वैधानिक कार्यवाही प्रस्तावित की जावेगी।
एक बीघा 130 रूपये जल कर
फिर भी कृषकों व्दारा कर जमा नहीं किया जाता क्यों?
इस बारे में किसानों का कहना है की जल संसाधन विभाग के संबंधित मैदानी कर्मचारियों व्दारा कृषकों को रबी सीजन में जल देने के लिए जो एग्रीमेंट किया जाता है उसमें पिछले कुछ वर्षों से कृषकों की वास्तविक भूमि को बड़ा कर किया गया है इस विषय में जांच होना चाहिए तथा पिछले कुछ वर्षों से नहर के अंतिम छोर तक जल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है,
एवं समय पर तालाब से नहर में जल नहीं दिया जाता है ।
इस संबंध में मैदानी कर्मचारियों की मंशा स्पष्ट रूप में कृषकों के विपरीत व प्रताड़ित करने वाली इंगित करती है।