मंदसौर में मिला प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली संजीवनी का पौधा
Last Updated: अगस्त 28, 2021 " 04:59 अपराह्न"
ad
मंदसौर में मिला प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली संजीवनी का पौधा
मंदसौर| मध्यप्रदेश के मंदसौर में गांधी सागर अभयारण्य में चमत्कारी बूटी प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली संजीवनी “अग्निशिखा” का पौधा मिला है| जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध गांधी सागर अभयारण्य में पहली बार वनस्पतियों का सर्वे हुआ। जिसमें लगभग विलुप्त मानी जाने वाली प्रजातियों के पौधे भी मिले हैं। जिसमें संजीवनी बूटी “अग्निशिखा” यानी विषलया का पौधा भी मिला है। धार्मिक मान्यता है कि रामायण काल में लक्ष्मण जी के प्राण बचाने में इस औषधि का उपयोग किया गया था।
11 दिन तक चले इस सर्वे में ओड़िशा के वनस्पति विशेषज्ञ डॉक्टर परवेज खान (रिसर्च स्कॉलर, महाराजा श्री राम चंद्र भांजा भांजा देव विश्वविद्यालय) एवं सुभद्रा बारिक ने 6 लोगों की टीम के साथ सर्वे किया। जिसमें उन्हें करीब 502 से अधिक प्रजातियां मिली है। जिनमें से 300 से अधिक औषधीय हैं और 70 प्रजातियां ऐसी हैं जो बहुत कम पाई जाती हैं। पहले वन विभाग के पास गांधीनगर में केवल 48 पेड़ पौधों की प्रजातियों का ही डाटा था।
डॉ परवेज खान ने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में कई औषधीय पौधों में मूल्यवान रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं जो कि बहुत उपयोगी हैं। यहां विस्तृत अध्ययन की जरूरत है औषधीय प्रजातियों का एक उचित दस्तावेज होना और स्वास्थ्य व स्वच्छता में सुधार के लिए उनकी क्षमता को जानना जरूरी है।
अग्निशिखा पौधे की विशेषता– रामायण काल में लक्ष्मण जी को इसी औषधि की मदद से बचाया गया था। यह पौधा आसानी से नहीं मिलता है। यह मध्य प्रदेश की विलुप्त प्राय प्रजातियों में शामिल है। इसे कलिहारी भी कहते हैं। इसे घाव पर लगाया जाता है। इसका लेप गर्भवती महिलाओं के पेट पर लगाने से प्रसूति में आसानी होती है। इसके अतिरिक्त ब्रीमेक प्लांट, दूधी, निर्गुंडी, गुरमार भी पाए गए हैं।