खरीफ में घाटा, रबी में रिकॉर्ड: अधिकारी गिनाएं उपलब्धि, किसान पूछें हिसाब
mk choudhary
Mo.9826931916
रतलाम, (स्पष्ट खबर)। मध्यप्रदेश के कृषि विभाग के शासकीय प्रक्षेत्रों की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है। उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास रतलाम के पत्र क्रमांक 1925 दिनांक 10/04/2026 के अनुसार रतलाम जिले के शासकीय कृषि प्रक्षेत्र पंचेड़ ने खरीफ 2025-26 में 27 लाख 47 हजार रुपये खर्च कर 22 हजार 262 रुपये की आय दर्ज की है।
एक ओर जहां किसान संगठन और किसान इन आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं फार्म प्रभारी ने अधिक बारिश और एवरेज कैलकुलेशन को वजह बताया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि रबी में गेहूं-चने के उत्पादन में उनका फार्म प्रदेश में अव्वल है।

सूत्र और सरकारी दस्तावेज क्या कहते हैं
खरीफ 2025 – बिंदु क्रमांक 3
पंचेड़ प्रक्षेत्र में 35 हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई। कुल उत्पादन 32.50 क्विंटल रहा। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 92 किलो निकली। इससे 22,262 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। रिमार्क में लिखा है: “खरीफ 2025 में अत्यधिक वर्षा होने से पूरी फसल जिले में खराब होने से उत्पादन नहीं हुआ।”

वित्तीय स्थिति – बिंदु क्रमांक 5 और 6
वर्ष 2025-26 में कुल आवंटन 31.34 लाख था, जिसमें से 27.47 लाख खर्च हुए। 3.87 लाख रुपये आहरण पर रोक के कारण खर्च नहीं हो पाए। लाभ-हानि पत्रक में बताया गया कि 27.47 लाख के व्यय में 9.19 लाख रुपये पूर्व वर्ष 2024-25 के लंबित देयकों का भुगतान भी शामिल है। खरीफ से 0.22 लाख की आय हुई। रबी 2025-26 की आय अभी तय नहीं है क्योंकि बीज संसाधन का कार्य जारी है।
रबी 2024-25 में लाभ – बिंदु क्रमांक 2
इसी फार्म ने रबी 2024-25 में अच्छा प्रदर्शन किया था। 4 हेक्टेयर में गेहूं से 116.40 क्विंटल और 16 हेक्टेयर में चने से 84.50 क्विंटल उत्पादन हुआ। इससे कुल 10.54 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
रबी 2025-26 – बिंदु क्रमांक 4
वर्तमान रबी में भी 4 हेक्टेयर में गेहूं और 16 हेक्टेयर में चना लगा। गेहूं 143.20 क्विंटल और चना 112.10 क्विंटल उत्पादित हुआ। दस्तावेज में “श्रेसिंग व अन्य संसाधन कार्य जारी” लिखा है। साफ शब्दों में अभी गेहूं और चना को बीज के रूप में तैयार करने का काम बाकी है, इस लिए अभी सरकार को इससे कोई पैसा भी नहीं मिला है।
प्रभारी का पक्ष :-
प्रभारी प्रक्षेत्र अधीक्षक बी.एम. सोलंकी ने बताया कि “गत वर्ष अत्यधिक बारिश के कारण जिले भर में फसलें खराब हो गई थीं। 35 हेक्टेयर में से कुछ ही हिस्से में फसल बची थी। क्रॉप कटिंग के बाद जिन खेतों में फसल पूरी तरह खराब थी, उनकी जुताई DDA साहब के सामने करवा दी गई थी। हार्वेस्टिंग केवल बचे हुए खेतों से की गई।”
उन्होंने कहा, “सरकारी रिपोर्ट में एवरेज निकालते समय पूरे 35 हेक्टेयर रकबे को जोड़ा जाता है, इसलिए प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कम दिख रही है। फार्म घाटे में नहीं है। गेहूं और चने के उत्पादन में हमारे यहां मध्यप्रदेश के सभी शासकीय फार्मों में सबसे ज्यादा उत्पादन हुआ है।”
सूत्रों और किसानों का तर्क है कि जावरा के बन्नाखेड़ा फार्म ने 29 हेक्टेयर में 110 क्विंटल सोयाबीन देकर 379 किलो/हेक्टेयर उत्पादकता दिखाई। ऐसे में पंचेड़ की 92 किलो/हेक्टेयर उत्पादकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किसानों ने प्रदेश के सभी शासकीय फार्मों का CAG से विशेष ऑडिट, हर फार्म के लिए उत्पादन का टारगेट तय करने और क्रॉप कटिंग की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शासकीय फार्मों का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन और नई तकनीक का प्रदर्शन भी है। ऐसे में एक फसल के आंकड़े के आधार पर पूरे वर्ष का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। रबी 2025-26 का अंतिम हिसाब आने के बाद ही सही तस्वीर स्पष्ट होगी।
वहीं अगर सूत्रों की मानें तो जिले में गेहूं का जो 45 क्विंटल पर हेक्टेयर का एवरेज उत्पादन हुआ है उससे कहीं अधिक कम उत्पादन पंचेड़ प्रक्षेत्र में हुआ है। तो प्रश्न उठता है कि प्रदेश में अन्य सरकार फार्मों का उत्पादन के आंकड़ों पर भी कई प्रश्नचिन्ह लग सकते हैं।
इनका कहना है:-
धामनोद के किसान जितेन्द्र पाटीदार ने बताया कि मेने ढाई हेक्टेयर के चने बोएं थे । जिसमें 10 क्विंटल उत्पादन हुआ था।
सरकारी 35 हेक्टेयर मेंसे किसान लाख रुपए से भी अधिक तो केवल भूसा बेंच कर कमा सकते है।
भारतीय किसान संघ सैलाना तहसील अध्यक्ष पीरचंद पाटीदार
ने कहा कि सरकारी फार्म में फसलों के उत्पादन आंकड़े अधिकारियों की कार्यक्षमता पर प्रश्न उठा रहे हैं। उत्पादन सुधार के लिए अधिकारियों को किसानों से मिलकर एक सलाहकार समिति बनाकर उत्पादन में सुधार लाया जा सकता है।
इनका कहना है:-
बीएस अर्गल
उप-संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग रतलाम
अभी मेने उसका(प्रक्षेत्र) लेखा-जोखा देखा नहीं है, पुराना क्या हुआ था क्या नहीं, इसकी जानकारी मुझे अभी नहीं है। (गेहूं-चना, उपज) जब रिकोर्ड आएगा तब पता चलेगा। मैं रतलाम में अभी इसी महीने आया हूं।
501 total views
















