रतलाम/ बहुचर्चित बंजली चरनोई भूमि पर अवैध दरगाह निर्माण मामले में प्रशासन को बड़ी जीत, सिविल कोर्ट ने मुतवल्ली की स्टे याचिका खारिज की
Last Updated: सितम्बर 18, 2026 " 11:50 अपराह्न"
Ratlam :दशम व्यवहार न्यायाधीश ने कहा – शासन से भूमि आवंटन या निर्माण अनुमति का एक भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाया वादी, उर्स की अस्थायी अनुमति से नहीं मिलता स्वामित्व का अधिकार
रतलाम (स्पष्ट खबर)। ग्राम बंजली स्थित करोड़ों रुपये की शासकीय चरनोई भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा दरगाह के नाम पर अवैध कब्जे और निर्माण के बहुचर्चित मामले में राजस्व प्रशासन के पक्ष में बड़ा न्यायिक निर्णय आया है। दशम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) रतलाम श्री अरुण सिंह ठाकुर की अदालत ने तहसीलदार के बेदखली आदेश के विरुद्ध दायर स्थगन याचिका को निरस्त कर दिया है।
मिली जानकारी अनुसार न्यायालय ने 16 सितंबर 2026 को पारित अपने 8 पृष्ठीय विस्तृत आदेश में मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा द्वारा प्रस्तुत आवेदन अंतर्गत आदेश 39 नियम 1 व 2 सीपीसी (व्यवहार वाद क्रमांक 184ए/2026) को खारिज करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की है।
न्यायालय की मुख्य टिप्पणियां:
वादी ऐसा कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह असफल रहा है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि मध्य प्रदेश शासन ने संबंधित शासकीय चरनोई भूमि सर्वे क्रमांक 44 उसे, किसी ट्रस्ट या कमेटी को विधिवत आवंटित की हो अथवा वहां पक्का निर्माण करने की अनुमति प्रदान की हो।
प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष उर्स आयोजन के लिए दी जाने वाली सीमित अवधि की मौखिक/अस्थायी अनुमति को भूमि पर स्वामित्व या स्थायी निर्माण का अधिकार नहीं माना जा सकता।
तहसीलदार रतलाम शहर द्वारा विधिवत कारण बताओ नोटिस जारी कर वादी को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अवसर दिया गया था, अतः प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया है। तहसीलदार की कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता।
मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत पारित आदेश के विरुद्ध अपील/रिवीजन का अधिकार धारा 257 के तहत राजस्व न्यायालयों (एसडीओ/कलेक्टर) को है। इस स्थिति में सिविल कोर्ट से अंतरिम राहत का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।
क्या है पूरा मामला: ग्राम बंजली स्थित शासकीय चरनोई भूमि सर्वे क्रमांक 44 का कुल रकबा 0.200 हेक्टेयर है। शिकायत के अनुसार इसमें से लगभग 0.03 हेक्टेयर भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा दरगाह के नाम पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्का निर्माण कर लिया गया था।
इस अतिक्रमण की शिकायत धामनोद निवासी एवं बजरंग दल रतलाम विभाग सह संयोजक नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी) ने प्रशासन से की थी। उनके साथ नीलेश सोनी, ललित गोस्वामी, राजेश कटारिया, मुकुल पँवार, बंटी शर्मा, सिद्धार्थ पंड्या, डॉ. जितेंद्र वर्मा, कुंदन गवली, गनी शक्तावत, राजाराम ओहरी, गौरव शर्मा, मुन्नू कुशवाह आदि हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी ज्ञापन सौंपकर अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार रतलाम शहर ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 01/अ-68/2026-27 दर्ज किया। स्थल निरीक्षण, पटवारी रिपोर्ट एवं पंचनामा के पश्चात 26 जून 2026 को तहसीलदार न्यायालय ने भूमि को शासकीय चरनोई दर्ज पाते हुए अवैध कब्जा प्रमाणित माना और म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत बेदखली के साथ 3,000 रुपये अर्थदंड का आदेश पारित किया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मुतवल्ली ने सिविल कोर्ट में वाद दायर कर स्टे मांगा था, जो अब खारिज हो गया है।
अब आगे क्या: स्टे आवेदन निरस्त होते ही शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी) ने कलेक्टर रतलाम, एसडीएम रतलाम एवं तहसीलदार रतलाम शहर को न्यायालय के आदेश की प्रति सौंपते हुए लिखित आवेदन दिया है। उन्होंने मांग की है कि राजस्व न्यायालय के बेदखली आदेश और सिविल कोर्ट से राहत न मिलने के बाद ग्राम बंजली की उक्त शासकीय चरनोई भूमि को नियमानुसार तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
पैरवी: शासन की ओर से लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सुरेश वर्मा तथा आवेदक नरेन्द्र शर्मा की ओर से अधिवक्ता विवेक उपाध्याय, वीरेंद्र कुलकर्णी एवं दीपक रजक ने पैरवी की।