मंदिर की संपत्ति देवता की, सरकार मालिक नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट
Last Updated: अक्टूबर 19, 2026 " 07:11 अपराह्न"
मंदिर की संपत्ति देवता की, सरकार मालिक नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार को झटका, गिफ्ट डीड को किया अमान्य
नई दिल्ली(स्पष्ट खबर)। मंदिरों की संपत्ति, उसके संरक्षण और सरकारी नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मंदिर की संपत्ति देवता की होती है, सरकार उसकी मालिक नहीं हो सकती।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि दान के जरिए देवता को समर्पित संपत्ति दानदाता, पुजारी, ट्रस्टी या राज्य की नहीं रह जाती, बल्कि देवता में निहित हो जाती है। उसकी देखरेख करने वालों का दायित्व उसे देवता के हित में सुरक्षित रखना है। प्रबंधन करने वाला व्यक्ति उसका स्वामी नहीं बन जाता।
सरकार संरक्षक है, मालिक नहीं पीठ ने कहा कि मंदिर की संपत्ति का प्रशासन और नियमन करने की सरकार की भूमिका उसे उसका मालिक नहीं बनाती। सरकार का काम संरक्षण करना है। सार्वजनिक उद्देश्य का हवाला देकर कानून के विपरीत किया गया हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता। सरकारी कार्यालय बनाने की आवश्यकता मंदिर की जमीन को मुफ्त में हस्तांतरित करने का कानूनी आधार नहीं बनती।
क्या था मामला मामला तमिलनाडु के इरोड जिले के कोडुमुडी गांव स्थित नागापलायम मरियम्मन-पोननाचियम्मन मंदिर की करीब 1 एकड़ 10 सेंट इनाम भूमि से जुड़ा था। अगस्त 2017 में मंदिर के एक अस्थायी ट्रस्टी ने यह जमीन तालुक कार्यालय बनाने के लिए राज्य सरकार को उपहार में दे दी थी। राजस्व अधिकारियों ने भी इसे स्वीकार कर लिया। इस ट्रांसफर को अदालत में चुनौती दी गई थी। मद्रास हाईकोर्ट ने मार्च 2019 में याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
कार्यालय नहीं हटेगा, देना होगा किराया सुप्रीम कोर्ट ने गिफ्ट डीड को अमान्य घोषित करते हुए भी मानवता के आधार पर जमीन पर बने तालुक कार्यालय को हटाने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को पट्टे पर बने रहने की अनुमति दी, लेकिन 8 मार्च 2019 से 31,000 रुपये प्रतिमाह किराया और 1 लाख रुपये हर्जाना मंदिर को देने का निर्देश दिया। किराए की हर तीन साल में समीक्षा होगी।