आर आर आर परियोजना ,में शासन ने लाखों में राशि लगाई लेकिन किसान फिर भी परेशान।
Last Updated: जनवरी 4, 2020 " 03:49 अपराह्न"
मामला धामनोद बांध, जल संसाधन विभाग का
रतलाम/धामनोद,04, जनवरी 2020 (मुकेश चौधरी)। शासन किसानों को समृद्ध बनाने के लिए प्रयासरत है , जिसमें अनेकों किसान कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही केन्द्र व राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से सिंचाई से संबंधित छोटी बड़ी अनेकों परियोजनाएं चलाई हुई है।
लेकिन जमिनी स्तर पर संबंधित कर्मचारियों व अधिकारी की लापरवाही व मनमानी के कारण लाखों रूपये की शासकीय राशि लगने के बाद किसानों को सुविधा मिलने की जगह समस्या का सामना करना पड रहा हैं।
इसका ताजा मामला रतलाम जिले के धामनोद में जीवित उदाहरण के रुपमें देखने को मिल जाएगा,
यहां जल संसाधन विभाग की मालिंट्री में आर आर आर योजना अंतर्गत रतलाम जिले के धामनोद बांध की कच्ची नहर के 4.07 किमी लाइनिंग कार्य 46.66 लाख की लागत राशि से वर्ष 2017 में कार्य पूर्ण करवाया गया,
जिसमें अनेकों अनियमितता कर किसानों को सुविधा देने के बदले आर्थिक नुकसान के साथ असुविधा देने का कार्य किया है।
नहर के लाइनिंग कार्य के पूर्व कच्ची नहर का लेवल खेतों के लेवल से उपर था
जिस से रबी सिजन में सिंचाई हेतू तालाब का पानी नहर में छोडने पर किसान नहर की मेड़ से सिधा पानी अपने खेतों में फसलों की सिंचाई केलिए आवस्यकता अनुसार किसी भी वक्त लेसकते थे,
लेकिन वर्ष 2017 में कच्ची नहर कि गहरी खुदाई कर लाइनिंग कार्य किया गया
जिस कारण नहर का लेवल खेतों के लेवल से निचे रह गया ओर खेतों का लेवल नहर से उपर , वर्तमान स्थिति यह है की नहर से अब किसानों को सिंचाई हेतू खेतों में पानी लेने के लिए विधुत पम्प पर निर्भर रहना पडता है
तथा बिजली का स्थाई व अस्थाई कनेक्शन बिजली कम्पनी से लेना पडता है, विधुत पम्प एंव बिजली बिल का आर्थिक भार 12 से 15 हजार रूपयों का है
तो वहीं किसानों को नहर से पानी लेने में बिजली सप्लाई की व्यवस्था पर के अनुसार ही खेतों में सिंचाई होती है
किसानों को इससे आर्थिक व शारीरिक नुकसान जो जल संसाधन विभाग की लापरवाही के कारण किसानों भुगत रहे है
साथ ही अब किसानों को नहर के पानी से खेतों में सिंचाई करने के लिए विधुत प्रदाय पर आश्रित रहना है।
किसानों व्दारा अनेकों शिकायतों को नजरअंदाज कर कच्ची नहर के लाइनिंग के निर्माण में भारी अनियमितताओं को अंजाम दिया गया हैं।
किसान मदन राव ने बताया की नहर के निर्माण के दौरान मैरे खेत का रास्ता बंद कर दिया गया है
मैरे बिच खेत से नहर निकाली गई है जहाँ पर मैरे एक खेत से दुसरे खेत में हकाई जूताई के लिए वाहन ले जाना भी संभव नहीं है मैने कई बार अधिकारीयों से निवेदन किया लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला
वहीं नहर का निर्माण अतयंत घटिया किया गया हैं।
तथा नहर के लेवल के कारण प्रतिवर्ष किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा हैं।
किसान हरीओम पाटीदार का कहना है की नहर निर्माण घटिया किया गया हैं
जिस से इस वर्ष नहर में पानी छोड़ने पर नहर के लिकेज से मैरे दो बीघा खेत में पानी घुस गया जिसे फसल बोने के लिए तैयार किए गये खेत में 15 दिनों तक रबी फसल की बोवनी करने के लिए इंतजार करना पड़ा है तो वहीं नहर से पानी भी व्यर्थ बह रहा है।
जहां किसानों को रबी सिजन में नहर से सुविधा है तो दुविधा भी कम नहीं है तो वहीं बारीश में भी उक्त नहर टूटने से किसानों की फसलें प्रभावित होती है।