रूस की Coronavirus Vaccine सुरक्षित, ट्रायल में ऐंटीबॉडी बनती नजर आईं-

  
Last Updated:  सितम्बर 4, 2020 " 09:37 अपराह्न"

प्रतिकात्मक फोटो

Coronavirus Vaccine by Russia: मेडिकल जर्नल The Lancet में छपी एक स्टडी में दावा किया गया है कि रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन Sputnik V असरदार भी है और सुरक्षित भी।

एक नज़र:

  • रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन पर स्टडी के नतीजे छपे
  • लांसेट जर्नल में छपी स्टडी में दावा, सुरक्षित है वैक्सीन
  • असरदार भी बताया, ऐंटबॉडी विकसित होती पाई गईं
  • पिछले महीने इस वैक्सीन को अप्रूवल दे चुका है रूस

मॉस्को: कोविड-19 के रूसी टीके ‘Sputnik V’ के कम संख्या में मानवों पर किए गए परीक्षणों में कोई गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला परिणाम सामने नहीं आया है और इसने परीक्षणों में शामिल किए गए सभी लोगों में ‘ऐंटीबॉडी’ भी विकसित की। द लांसेट जर्नल में शुक्रवार को प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। रूस ने पिछले महीने इस टीके को मंजूरी दी थी जिसके बाद दुनियाभर, खासकर पश्चिम में इसे लेकर सवाल किया गया था। अमेरिका समेत दूसरे देशों ने कहा था कि स्टडी का डेटा उसे सुरक्षित और असरदार करार देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

टीके के शुरूआती चरण का यह परीक्षण कुल 76 लोगों पर किया गया और 42 दिनों में टीका सुरक्षा के लिहाज से अच्छा नजर आया। इसने परीक्षणों में शामिल सभी लोगों में 21 दिनों के अंदर ऐंटीबॉडी भी विकसित की। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि परीक्षण के द्वितीय चरण के नतीजों से यह पता चलता है कि इस टीके ने शरीर में 28 दिनों के अंदर टी-कोशिकाएं (Killer T-cells) भी बनाई।

ऐसे बना है टीका
इस दो हिस्से वाले टीके में रीकोम्बीनेंट ह्यूमन अडेनोवायरस टाइप 26 (आरएडी26-एस) और रीकॉम्बिनेंट ह्यूमन अडेनोवायरस टाइप 5 (आरएडी5-एस) शामिल हैं। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक ‘अडेनोवायरस’ के चलते आमतौर पर जुकाम होता है। टीके में इसे भी कमजोर कर दिया गया है ताकि वे मानव कोशिकाओं में प्रतिकृति नहीं बना पाएं और रोग पैदा नहीं कर सकें।

  • अगले 6 सप्ताह में तैयार हो सकती है वैक्सीनब्रिटिश मीडिया एक्सप्रेस.को.यूके में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक ब्रिटिश अधिकारी ने संडे एक्सप्रेस को बताया कि ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं। दोनों उम्मीदवार अलग-अलग कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। अगर सबकुछ सही रहा तो ऑक्सफर्ड की वैक्सीन अगले 6 सप्ताह में बनकर तैयार हो जाएगी। 
  • कुछ महीनों में इस वैक्सीन का शुरू होगा उत्पादनअधिकारी ने यह भी कहा कि वैक्सीन बनने के बाद कुछ ही महीनों में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। जिसे ब्रिटेन की पूरी आबादी को वैक्सीन की खुराक दी जा सके। अधिकारी ने आशा जताई कि इससे 2021 में जनजीवन तेजी से सामान्य हो सकता है। हालांकि, सरकार अभी देश को खोलने के लेकर काफी सतर्क नजर आ रही है। 
  • क्रिसमस से पहले सभी लोगों को दे देंगे वैक्सीनयूके वैक्सीन टास्कफोर्स की प्रमुख केट बिंघम ने कहा कि वैक्सीन को लेकर हम भी आशावादी हैं। लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम काम करते रहें और जश्न में सबकुछ भूल न जाएं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के अंतिम ट्रायल रिजल्ट जब यह संकेत दे देंगे कि इनका उपयोग सुरक्षित है, फिर इसके उत्पादन की तैयारी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैक्सीन को क्रिसमस से कुछ समय पहले लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। 
  • डेटा को लेकर वैज्ञानिकों ने जताई खुशीवैक्सीन के विकास से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि ट्रायल के दौरान हमें बहुत ही अच्छा डेटा मिल रहा है। शुरुआत में हम बीमारी को ट्रैक करने के लिए अस्पताल में एडमिट होने वाले मरीजों पर भरोसा कर रहे थे। लेकिन अब हम बहुत अधिक अप-टू-डेट डेटा प्राप्त कर रहे हैं। जिससे वैक्सीन के विकास की संभावना भी बढ़ी है। 
  • सबसे पहले किसे दी जाएगी वैक्सीनब्रिटेन की वैक्सीन टास्कफोर्स केट बिंघम के अनुसार, बुजुर्ग लोगों को युवाओं से अलग वैक्सीन दिए जाने की भी संभावना है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। वैक्सीन दिए जाने पर 65 की उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोगों, फ्रंटलाइन हेल्थ और सोशल केयर वर्कर्स को भी यह पहले दी जाएगी। 
  • रूस ने बिना ट्रायल वैक्सीन को दी मंजूरीरूस ने पहले ही अपनी कोरोना वैक्सीन Sputnik V को लॉन्च कर दिया है। हालांकि, उसे लेकर एक्सपर्ट्स को शक है क्योंकि बिना बड़ी आबादी पर टेस्ट किए ही, उसे अप्रूव कर दिया गया है। हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया था कि इस वैक्सीन ने कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों पर अच्छा असर दिलाया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनकी एक बेटी को इस वैक्सीन का डोज दिया गया है। 
  • चीन ने भी बिना ट्रायल लोगों को दी वैक्सीन की डोजदुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन ने एक महीने पहले ही अपने लोगों को वैक्सीन दे दी थी। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को खुलासा किया था कि वह 22 जुलाई से ही अपने लोगों को वैक्सीन की डोज दे रहा है। हालांकि, आयोग ने यह नहीं बताया कि चीन में क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम फेज में पहुंची चार वैक्सीन में से किसे लोगों को दिया गया है। इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी दावा किया कि लोगों पर इस वैक्सीन का कोई कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। 

इस टीके का उद्देश्य ऐंटीबॉडी और टी-सेल विकसित करना है, ताकि वे उस वक्त वायरस पर हमला कर सकें जब यह शरीर में घूम रहा हो और साथ ही SARS-CoV-2 द्वारा संक्रमित कोशिकाओं पर भी हमला कर सकें। रूस स्थित महामारी और सूक्ष्म जीवविज्ञान गामेलिया राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञाानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डेनिस लोगुनोव ने कहा, ‘जब ऐंटीवायरस टीका शरीर में प्रवेश करता है तो वह SARS-CoV-2 को खत्म करने वाले हमलावर प्रोटीन पैदा करता है।’

18-60 की उम्र के लोगों पर टेस्ट
उन्होंने कहा, ‘इससे प्रतिरक्षा प्रणाली को SARS-CoV-2 की पहचान करने और उस पर हमला करने के लिए सिखाने में मदद मिलेगी। SARS-CoV-2 के खिलाफ काफी मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए यह जरूरी है कि टीके की अतिरिक्त खुराक मुहैया की जाए।’ ये परीक्षण रूस के दो अस्पतालों में किए गए। परीक्षणों में 18 से 60 साल की आयु के स्वस्थ व्यक्तियों को शामिल किया गया। परीक्षण के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए जॉन हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, अमेरिका, के नोर बार-जीव ने कहा कि परीक्षण के नतीजे उत्साहजनक है लेकिन ये छोटे पैमाने पर किए गए।

अध्ययन के लेखकों ने कहा है कि विभिन्न आबादी समूहों में टीके की कारगरता का पता लगाने के लिए और अधिक अध्ययन किए जाने की जरूरत है। रूसी अनुसंधान केंद्र के प्रो. अलेक्जेंडर गिनत्सबर्ग ने कहा कि टीके के तीसरे चरण के परीक्षण की 26 अगस्त को मंजूरी मिली है। इसमें 40,000 स्वयंसेवियों को विभिन्न आयु समूहों से शामिल किए जाने की योजना है।

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