रतलाम/कलेक्टर ने अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर राजस्व न्यायालयों से संबंधित समस्याओं एवं सुझावों पर की विस्तृत चर्चा

  
Last Updated:  अगस्त 22, 2026 " 07:21 अपराह्न"

Ratlam: कलेक्टर ने सभी बिंदुओं पर ध्यान देते हुए उचित कार्यवाही का दिया आश्वासन

रतलाम 22 अगस्त(स्पष्ट खबर)। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने शनिवार को अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली से संबंधित समस्याओं, सुझावों एवं व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की। कलेक्टर ने अधिवक्ताओं द्वारा बताए गए सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना तथा उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

प्रकरण दर्ज करने से लेकर आदेश एवं कॉज लिस्ट जारी करने तक की प्रक्रिया पर चर्चा

बैठक में अधिवक्ताओं ने बताया कि कई राजस्व न्यायालयों में रीडर स्तर पर प्रकरण दर्ज होने में काफी समय लग जाता है। कई बार प्रकरण दर्ज करने में ही एक माह तक का समय व्यतीत हो जाता है। अधिवक्ताओं ने न्यायालयों में वाद सूची (कॉज लिस्ट) नियमित रूप से जारी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक कॉज लिस्ट जारी नहीं होने से प्रकरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई होती थी। वर्तमान में लगभग एक सप्ताह से वाद सूची जारी होना प्रारंभ हुई है।

अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि कई न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों के बैठने का समय नियत नहीं होने से परेशानी होती है। विशेष रूप से जावरा की चार टप्पा तहसीलों में कई बार एक ही समय पर न्यायालय लगने से अधिवक्ताओं को एक साथ अलग-अलग न्यायालयों में उपस्थित होने में कठिनाई आती है।

रीडर द्वारा पेशी के समय फाइल पूर्व से तैयार नहीं रखने के कारण सुनवाई में विलंब होने, प्रकरण में समस्त कार्रवाई पूर्ण होने के बाद भी दो-तीन माह तक आदेश जारी नहीं होने तथा प्रकरणों को वेब जीआईएस पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने से नकल प्राप्त करने में विलंब होने की समस्याएं भी बताई गईं। अधिवक्ताओं ने बताया कि कुछ मामलों में नकल मिलने में देरी के कारण अपील की अवधि तक प्रभावित होती है।

अधिवक्ताओं ने बताया कि कई राजस्व न्यायालयों के आदेशों में प्रकरण के दौरान अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांतों का उल्लेख नहीं किया जाता है। उन्होंने इस संबंध में उचित ध्यान देने का अनुरोध किया।

अपर कलेक्टर स्तर पर प्रकरणों की निगरानी को लेकर भी अधिवक्ताओं ने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि निगरानी सीमित शक्ति है, इसलिए इसका उपयोग विशेष एवं आवश्यक प्रकरणों में ही किया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं ने बताया कि पूर्व में निजी भूमि पर बेजा कब्जे से संबंधित कुछ प्रकरणों में अनावश्यक निगरानी के कारण विलंब की स्थिति बनी थी, हालांकि वर्तमान में इस समस्या का समाधान हुआ है।

लोक सेवा गारंटी से संबंधित प्रकरणों में भी अधिवक्ताओं ने समस्या बताई। उन्होंने कहा कि कुछ राजस्व प्रकरण नकारात्मक रूप से निष्पादित कर दिए जाते हैं तथा कई लोक सेवा केंद्रों द्वारा लोक सेवा गारंटी प्रकरणों की अपील दर्ज करने में यह कहकर मना कर दिया जाता है कि पोर्टल काम नहीं कर रहा है।

इसके अलावा निजी भूमि के खसरा सुधार के प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारियों द्वारा मूल फाइल सीधे पटवारी के पास भेजे जाने की प्रक्रिया पर भी अधिवक्ताओं ने आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

कलेक्टर ने सभी बिंदुओं पर उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन

कलेक्टर श्री कटेसरिया ने अधिवक्ताओं द्वारा रखे गए सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं व्यवस्थित बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर अधिवक्ताओं द्वारा बताए गए व्यावहारिक मुद्दों पर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

कलेक्टर ने कहा कि अधिवक्ताओं का मैदानी एवं न्यायालयीन अनुभव प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। उनके सुझावों से राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा आम नागरिकों को समय पर न्याय एवं सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

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