शादी के लिए धर्म परिवर्तन पर एतराज़ के फ़ैसले क़ानून की नज़र में ठीक नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट – प्रेस रिव्यू
Last Updated: नवम्बर 24, 2020 " 10:31 पूर्वाह्न"
फाइल फोटो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि देश के नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है चाहे वो किसी भी जाति, धर्म या पंथ से हो.
इलाहाबाद| साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन पर आपत्ति जताने वाले पिछले दो फ़ैसले क़ानून की नज़र में ठीक नहीं थे. इस ख़बर को हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने पहले पन्ने पर प्रमुखता दी है
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज नक़वी और विवेक अग्रवाल की दो जजों की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के रहने वाले सलामत अंसारी और उनकी पत्नी प्रियंका खरवार उर्फ़ आलिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये कहा.
प्रियंका ने अपना धर्म परिवर्तन किया था और उनके पिता ने पुलिस में इस बाबत शिकायत की थी. पुलिस की कार्रवाई को निरस्त करने के लिए पति-पत्नी दोनों ने अदालत की शरण ली. अख़बार लिखता है कि यह फ़ैसला अदालत ने 11 नवंबर को ही दे दिया था लेकिन इसे सार्वजनिक सोमवार को किया गया है
अख़बार के अनुसार अब जबकि उत्तर प्रदेश सरकार शादी के लिए धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक क़ानून बनाने की योजना पर काम कर रही थी तो हाई कोर्ट का यह फ़ैसला उसके लिए समस्या पैदा कर सकता है
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक भाषण के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट के ही एक आदेश का उल्लेख करते हुए कहा था कि ‘शादी-ब्याह के लिए धर्म-परिवर्तन आवश्यक नहीं है, नहीं किया जाना चाहिए और इसको मान्यता नहीं मिलनी चाहिए. सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव-जिहाद को रोकने के लिए सख़्ती से कार्य करेंगे. एक प्रभावी क़ानून बनाएंगे.’
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फ़ैसला उसके दो पुराने फ़ैसलों के लिहाज से भी विरोधाभासी है जो साल 2014 और 2020 में एकल जज की बेंच ने सुनाए थे.