धामनोद में तीन दिवसीय मेला का आज होगा समापन, रात्रि को आर्केस्ट्रा का आयोजन

  
Last Updated:  मार्च 17, 2026 " 04:52 अपराह्न"

Ratlam: धामनोद में तीन दिवसीय मेला का आज होगा समापन, रात्रि को आर्केस्ट्रा का आयोजन

रतलाम(स्पष्ट खबर/ सुनील सिंह परिहार)। नगर परिषद धामनोद द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार तीन दिवसीय श्री शीतला माता मेला का आयोजन किया जा रहा है।
15 मार्च से 17 मार्च 2026 तक आयोजित मेले का शुभारंभ रविवार को संत श्री ब्रह्माचारी गणेश दास जी महाराज, भाजपा नामली मंडल अध्यक्ष दिनेश जाट, भाजपा सैलाना मंडल पूर्व अध्यक्ष श्याम धाकड़ के आतिथ्य में संपन्न हुआ।

धामनोद में परंपरागत प्रतिवर्ष लगने वाले तीन दिवसीय मेला पूर्व में स्थानीय आजाद चौक पर लगता था उसके बाद श्री कालिका माता मंदिर प्रांगण और अब कुछ वर्षों से स्थानीय श्री शीतला माता मंदिर खेड़ा क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। पूर्व में स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा मेला आयोजन किया जाता था। वर्ष 2010 से धामनोद को नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद से परंपरागत मेला आयोजन नगर परिषद द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष भी मेले के सफल आयोजन हेतु नगर परिषद द्वारा इस वर्ष प्रथम बार मेला समिति बनाई गई है।

मेला में आज आक्रेस्ट्रा-

नागरिकों ने मेला में उठाया झूले , खरीदारी, खानपान के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठा रहे हैं।
नगर परिषद द्वारा नागरिकों के मनोरंजन हेतु तीन दिवसीय श्री शीतला माता मेला के दूसरे दिन सोमवार रात्रि को अनुराग इवेंट द्वारा भगवान श्री हनुमानजी और मां कालिका की झांकी का प्रदर्शित किया गया। वहीं आज मंगलवार को तीन-दिवसीय मेला के अंतिम दिवस रात्रि को अनुराग इवेंट के मोंटी, रानू भिलवाड़ा, डेनी अलबेला, मिस मुस्कान, निशा इंदौरी द्वारा आक्रेस्टा में रंगारंग प्रस्तुतियां दी जावेगी।

इनका कहना है:-

मेला समिति अध्यक्ष मदनलाल पाटीदार ने बताया कि नगर परिषद द्वारा इस बार मेला आयोजन समिति बनाई है। मेला समिति की मांग पर मेला परिसर में सुरक्षा उपकरणों के साथ ही सीसी टीवी कैमरे लगवाए गए हैं। मेला व्यापारियों से लिए जाने वाले व्यापार शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। मनोरंजन के लिए मेला के दूसरे एवं अंतिम दिवस आक्रेस्ट्रा-का आयोजन किया जा रहा है।
हालांकि कर्मचारियों की लापरवाही की वज़ह से मेला का पर्याप्त प्रचार- प्रसार नहीं हुआ है। उसके बावजूद नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार- प्रसार किया जा कर परंपरागत मेला आयोजन के प्रति उत्साह एवं अपनी जिम्मेदारी निभाई जा रही है।

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