Rajasthan: बांसवाड़ा में सोने की पहली खदान की नीलामी जल्द, ई-पोर्टल पर नीलामी के लिए निविदा होगी जारी

  
Last Updated:  फ़रवरी 17, 2024 " 02:30 अपराह्न"

Rajasthan Goldmines News: वीरों की घरती राजस्थान अब सोना उगलने की तैयारी में है, सबकुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही राजस्थान का बांसवाड़ा जिला का नाम दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

राजस्थान खान विभाग की सचिव आनंदी ने कहा कि विभाग ने इन खानों की ई-नीलामी के लिए सभी तैयारियां कर ली हैं और आवश्यक जानकारी एक महीने के भीतर पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी।14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सोने का विशाल भंडार उन्होंने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि बांसवाड़ा में घाटोल तहसील के भुकिया-जगपुरा के 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सोने का विशाल भंडार है।

इस क्षेत्र में व्यापक अन्वेषण के बाद 113.52 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है, इसमें स्वर्ण धातु की मात्रा 222.39 टन आंकी गई है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक यहां सोने के अयस्क के खनन के दौरान 1 लाख 74 हजार टन से अधिक तांबा, 9,700 टन से अधिक निकल और 13,500 टन से अधिक कोबाल्ट खनिज प्राप्त होगा।

25% होगी राजस्थान की हिस्सेदारी
बता दें कि राजस्थान देश में ऐसा दूसरा राज्य बन जाएगा जो जहां से सोना निकलेगा। इसके बाद देश में राजस्थान की सोने को लेकर 25% हिस्सेदारी हो जाएगी। इसके अलावा कर्नाटक में ही प्राइवेट सेक्टर में मुंदा ग्रुप की रामा माइंस और आंध्र प्रदेश में डेक्कन गोल्ड माइंस में काम शुरुआती तौर पर जारी है।

ई-पोर्टल पर नीलामी के लिए निविदा होगी जारी

दो सोने की खदानों की ई-नीलामी के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के साथ लगभग एक महीने में भारत सरकार के ई-पोर्टल पर नीलामी के लिए निविदा जारी की जाएगी।

खान सचिव ने कहा, बांसवाड़ा के भुकिया-जगपुरा में राज्य की पहली सोने की खदानों की नीलामी के लिए हम युद्ध स्तर पर तैयारी कर रहे हैं।

इन सोने की खदानों से सोने के साथ-साथ तांबा, निकल और कोबाल्ट खनिज भी प्रचुर मात्रा में प्राप्त होंगे। इससे इलेक्ट्रॉनिक, पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, बैटरी समेत कई उद्योगों में नए निवेश के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे। तांबा उद्योगों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में कच्चे माल के रूप में तांबे की उपलब्धता बढ़ेगी, जबकि निकल बैटरी उद्योग, सिक्का ढलाई, इलेक्ट्रॉनिक उद्योग आदि को तेजी प्रदान करेगा।

अधिकारियों ने कहा,”कोबाल्ट का उपयोग एयरबैग, पेट्रोकेमिकल उद्योग आदि में किया जा सकता है और इसके कच्चे माल की आपूर्ति के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो जाएगी। राज्य में तांबा, निकल और कोबाल्ट से संबंधित उद्योगों में नए निवेश से प्रचुर अवसर पैदा होंगे।” राजस्व और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार।

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