गोवर्धन पूजा आज, श्रीजी को लगेगा अन्नकूट का भोग, रोशनी से सजे मंदिर

  
Last Updated:  नवम्बर 15, 2020 " 12:52 अपराह्न"

 दीपों के त्योहार दीपावली के अगले ही दिन गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती है यानी गोवर्धन का त्योहार जिसे अन्नकूट महोत्सव भी कहा जाता है वो मनाया जाता है। इस दिन शहर के सभी मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और सभी जगह बड़े पैमाने पर अन्नकूट बनाया जाता है और अन्नकूट का ही भोग इस दिन भगवान श्री कृष्ण को लगाया जाता है।

इस त्यौहार के दिन प्रकृति और गाय की पूजा की जाती है। शहर में लोग अपने घरों के बाहर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर शाम के समय उसकी पूजा करते हैं और दीपोत्सव भी मनाते हैं।

इसीलिए मनाया जाता है गोवर्धन का त्यौहार

युगों पहले की बात है भगवान श्री कृष्ण अपने दोस्तों के साथ गाय चराते हुए गोवर्धन पर्वत के पास जा पहुंचे। वहां पहुंच कर उन्होंने देखा कि सभी लोग एक उत्सव मना रहे हैं। जब श्री कृष्ण ने इसका कारण जानना चाहा तो गोपियों ने उनसे कहा कि यहां मेघ यानी देव स्वामी इंद्रदेव की पूजा कर रहे हैं। उनकी पूजा करने से वो खुश होंगे और वर्षा अच्छी होगी जिसके फलस्वरूप खेतों में अन्य उत्पन्न होगा और ब्रजवासियों का भरण पोषण हो पाएगा। यह सुनकर श्री कृष्ण सबसे बोले कि इंद्र से अधिक शक्तिशाली तो गोवर्धन पर्वत है। इस पर्वत के कारण ही वर्षा होती है इसलिये सबको इंद्र से भी ज्यादा बलशाली गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।  श्री कृष्ण की बात सुनकर सभी लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। लेकिन यह बात भगवान इंद्र को नागवारा गुज़री। इंद्र इसे देखकर बेहद क्रोधित हुए और मेघ को आज्ञा दी कि जाएं और गोकुल पर जमकर बरसें। बारिश इतनी भयावह हुई कि सभी ग्वाले श्री कृष्ण के पास आकर बोले कि अब क्या किया जाए। तब श्री कृष्ण ने सभी लोगों को गोवर्धन पर्वत के शरण में चलने के लिए कहा। सभी ग्वाले- गोपी अपने-अपने पशुओं के साथ गोवर्धन की तराई में आ गए। यहां श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को पहले ही अपनी कनिष्क उंगली में उठाकर लिया था जिस वजह से सभी गोकुलवासी इसके नीचे सुरक्षित बैठ गए। इंद्र के प्रताप से अगले 7 दिनों तक लगातार बारिश होती रही, लेकिन श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रज वासियों तक बारिश की एक बूंद भी नहीं पड़ी। यह अद्भुत चमत्कार देखकर इंद्रदेव समझ गए कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। फिर भगवान ब्रह्मा ने इंद्र देव को बताया कि श्री कृष्ण, भगवान विष्णु के अवतार हैं यह सच जानकर इंद्र देव ने श्री कृष्ण से क्षमा मांगी। श्री कृष्ण ने इंद्र देव को क्षमा किया और सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को भूमि तल पर रखा। साथ ही ब्रजवासियों से कहा अब वह हर साल गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व मनाए और तब से ही इस त्योहार को मनाने की परंपरा चली आ रही है।

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