ट्रैक्टर परेड में उपद्रव के बाद ऐक्शन मोड में गृह मंत्री शाह, दिया हिंसा में शामिल होने वालों की जल्द पहचान करने का आदेश

  
Last Updated:  जनवरी 28, 2021 " 10:02 पूर्वाह्न"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। (फाइल फोटो)

नई दिल्ली|केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में शामिल लोगों की जल्द से जल्द पहचान करने का आदेश दिया है। शाह ने हिंसा की घटना के दूसरे दिन बुधवार को दिल्ली के ताजा हालात की समीक्षा के लिए एक मीटिंग की जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस से कहा कि हिंसा एवं देशविरोधी गतिविधियों में शामिल एक भी व्यक्ति गिरफ्त से बचना नहीं चाहिए।

अब तक 25 FIR दर्ज, 50 किसान नेता नामजद
दिल्ली पुलिस अब तक 25 एफआईआर दर्ज कर चुकी है जिनमें 50 किसान नेताओं को नामजद किया गया है। वहीं, करीब 70 उपद्रवियों पर भी शिकंजा कसा जा चुका है। इनमें करीब 20 की गिरफ्तारी हुई है जबकि करीब 50 उपद्रवियों को अभी हिरासत में रखा गया है। बुधवार की मीटिंग में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने गृह मंत्री शाह को इन सबकी विस्तृत जानकारी दी।


साक्ष्य जुटाने में जुटी दिल्ली पुलिस

उन्होंने बताया कि अब दिल्ली पुलिस का पूरा फोकस अगले कुछ दिनों में सीसीटीवी और वीडियो फुटेज खंगालकर साक्ष्य जुटाने और उन लोगों की पहचान करने पर होगा जिन्होंने हिंसा के लिए उकसाया और जो खुद हिंसा में शामिल रहे। जांच इस बात की जाएगी कि इतना बड़ा बवाल काटने के लिए फंड और संसाधन कहां से मुहैयार कराई गई। सूत्रों की मानें तो पहचान में आने वाले सभी उपद्रवियों, किसान संगठनों के नेताओं पर कड़ी कार्रवाई होना तय है।

मनी लॉन्ड्रिंग के मुकदमे का भी खतरा
सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी दिल्ली पुलिस की एफआईआर के आधार पर किसान नेताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकता है। सरकार को शक है कि कुछ किसान नेता देशविरोधी संगठनों से फंडिंग ले रहे हैं। फिलहाल ईडी कानूनी सलाह लेने वाली है जिसके बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा। एनआईए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की ओर से किसान नेताओं को हुई फंडिंग के मामले में पहले से ही केस दर्ज कर जांच कर रही है।

पल्ला झाड़ रहे किसान नेता
उधर, किसान नेताओं ने भी स्थिति की गंभीरता समझते हुए चालाकी दिखाई और खुद को हिंसा एवं उत्पात की घटनाओं से खुद को अलग कर लिया। दो किसान संगठन ने तो आंदोलन भी खत्म कर दिया। हालांकि, अभी आंदोलन में डटे किसान संगठनों के नेताओं ने जोर देकर कहा कि ट्रैक्टर परेड के दौरान बाहरी तत्वों ने बवाल काटा जिसकी जांच होनी चाहिए।


दर्शन पाल जैसे प्रमुख नेताओं पर शक

वैसे दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों को लगता है कि दर्शन पाल जैसे प्रमुख किसान नेताओं ने उग्रवादी तत्वों को सिंघु, टिकरी और गाजीपुर की सीमाओं पर भड़काया। वहीं, लाल किले पर हुए उपद्रव के पीछे पंजाबी ऐक्टर दीप सिद्धू की प्रमुख भूमिका सामने आ रही है। उसी ने लाल किले की प्राचीर पर सिखों का धार्मिक झंडा ‘निशान साहिब’ फहराने का आइडिया दिया।


दीप सिद्धू को जाएगा NIA का दूसरा नोटिस

सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि राष्ट्रीय जांच अभिकरण (NIA) जल्द ही ताजा नोटिस जारी कर दीप सिद्धु को समन देगी और उसे सिख फॉर जस्टिस (SFJ) और बब्बर खालसा जैसे खालिस्तान समर्थक संगठनों के खिलाफ मुकदमों में गवाह बनाएगी। एनआईए ने दीप सिद्धू समेत 40 लोगों को गवाह के तौर पर समन भेजा है जिनमें से सिर्फ 15 से 16 लोग ही एजेंसी पहुंचे हैं।


खालिस्तानी संगठनों पर भी नजर

सिद्धू ने पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था। 15 दिसंबर 2020 को दर्ज एनआईए की एफआईआर के मुताबिक, एसएफजे एवं अन्य प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठनों ने नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच डर का माहौल बनाने, साजिश रचने और उन्हें उपद्रवी गतिविधियों में धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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