शिक्षक श्री राठौर का कमाल, इनके तरीके को आप सभी भी अपना सकते हैं, पर्यावरण की दिशा में कर सकते हैं प्रयास

  
Last Updated:  जून 9, 2021 " 07:25 अपराह्न"

हर साल बच्चों से बनवाते सीड बॉल्स और जंगल में झाड़ियों में फिकवा देते

मंदसौर|प्राथमिक स्कूल बड़ोदिया, भानपुरा के शिक्षक श्री मुकेश राठौर का कार्य प्रतिवर्ष कमाल करता है। शिक्षक श्री राठौर प्रति वर्ष अपने प्राथमिक स्कूल के बच्चों से सीड बॉल्स बनवाते हैं तथा जंगलों में जाते वक्त झाड़ियों की अंदर फेंक देते हैं। जिससे जैसे ही बारिश होती है। वहां से पौधे उग जाते हैं और वह पौधे बड़े हो जाते हैं। उनके द्वारा इस तरह से किए जा रहे कार्य पर्यावरण के लिए बहुत ही लाभदायक है। आप सभी भी उनके इस तरीकों को अपना सकते हैं तथा पर्यावरण बचाव के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं।

शिक्षक श्री राठौर बताते हैं कि कोरोना काल मे गिलोय का उपयोग बहुत हुआ और अपने नाम के अनुरूप ही अमृता साबित हुई। गिलोय को राष्ट्रीय ओषधि घोषित करने की मांग भी की जा रही है। गिलोय के 4-4 फिट के टुकड़ों को पेड़ो के ऊपर डाल दिए जाएं या जड़ के पास लगा दिए जाय तो परपोषी लता है, चल जाएगी। शून्य निवेश का प्रोजेक्ट है।

सीड बॉल्स के द्वारा हर आफिस या स्कूल में नीम के पेड़ होते ही है उनके आसपास से नीम की निम्बोली इकट्ठी कर सामान्य मिट्टी में गेंद बनाई जाए और उनको जहाँ भी जंगल मे झाड़ियां दिखे उन झाड़ियों में डाल दी जाए। अनुकुलता मिलते ही वो अंकुरित हो जायेगे ओर झाड़ियां स्वय उनकी संरक्षक बन जाएगी। इमली भी विलुप्त प्रायः ही है क्यो की इमली के नए पौधे कोई नही लगा रहा है, तो पर्यावरण बॉल में इमली के बीजों का भी उपयोग कर सकते है जो कि आसानी से कचोरी सेंटर वाले चटनी बनाने के बाद फेक देते है।

वटवृक्ष की डाल (कलम लगाने के लिए,) का उपयोग भी हम वृक्षारोपण के रुप में करे तो मात्र 1 साल बाद ही हमे 7 फिट ऊँचा वृक्ष मिलेगा ,धर्मिकता के चलते इसको काटा भी नही जाता है। 15 से 20 इंच बारिश के बाद या अगस्त में इसकी 6 से 7 फिट ऊची टहनी का रोपड़ किया जा सकता है।

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