रतलाम/ 17 जुलाई को धामनोद परिषद में घमासान तय: पार्षद मांगेंगे डीजल-अतिक्रमण का हिसाब
Last Updated: जुलाई 15, 2026 " 09:43 पूर्वाह्न"
Ratlam :पार्षदों द्वारा अधिनियम 1961 के तहत 17 जुलाई को नगर परिषद की बैठक में मांगा जाएगा जवाब
Uttam Sharma chief editor Mo. 9425104324 रतलाम(स्पष्ट खबर)। नगर परिषद धामनोद में डीजल खर्च और अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति और मिलीभगत का खेल चल रहा है। 17 जुलाई 2026 को होने वाले साधारण सम्मेलन से पहले दो पार्षदों द्वारा उठाए गए सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्ड 11 के पार्षद मुकेश चौधरी और वार्ड 4 के पार्षद मदनलाल पाटीदार ने म.प्र. नगरपालिका अधिनियम 1961 के तहत लिखित में जानकारी मांगकर आरोप लगाया है कि डीजल के बिलों में फर्जीवाड़ा और अतिक्रमण नोटिस में जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है।
1. डीजल में घोटाला? कागजों में दौड़ रही गाड़ियां पार्षद मुकेश चौधरी ने 21/05/2026 को धारा 223 के तहत पत्र देकर सीधा सवाल किया।
शंका के बिंदु: फर्जी वाहन: 20/05/2026 तक डोर-टू-डोर के नाम पर कितने वाहन पंजीकृत हैं? कितने चालू हैं और कितने सालों से खराब होकर सिर्फ कागजों में डीजल खा रहे हैं? बिलों का खेल: वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में लाखों का डीजल खर्च दिखाया गया, लेकिन वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। महीने-वार खपत का ब्यौरा न देने से मिलीभगत का अंदेशा बढ़ गया है। पारदर्शिता जीरो: अगर सब सही है तो महीने-वार डीजल की शीट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? पार्षद का आरोप है कि डीजल के नाम पर जनता के पैसे की लूट हो रही है।
2. अतिक्रमण नोटिस: दिखावा, कार्रवाई नहीं पार्षद मदनलाल पाटीदार ने 11/06/2026 को धारा 187, 223, 245 का हवाला देकर 1.5 साल का रिकॉर्ड मांगा।
उठे सवाल: चयनात्मक कार्रवाई: 01.01.2025 से 29.05.2026 तक किसे नोटिस दिया गया और किसे बचा लिया गया? नाम-वार्ड सहित पूरी सूची मांगी।
नोटिस : कितनों का अतिक्रमण हटा और कितने मामले जानबूझकर लंबित रखे गए? कारण क्या है? दंड का अभाव: दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर अब तक धारा 187, 223, 245 के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इससे साफ है कि अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच मिलीभगत है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नोटिस सिर्फ कमजोर लोगों को दिए जाते हैं। रसूखदारों के अतिक्रमण पर आंख बंद कर ली जाती है।
17 जुलाई को होगा असली इम्तिहान दोनों पार्षदों ने मांग की है कि इन सवालों के जवाब आगामी सम्मेलन में पटल पर रखे जाएं।
सवाल वही है – अगर भ्रष्टाचार नहीं है तो पारदर्शिता क्यों नहीं? और अगर कार्रवाई हो रही है तो शहर में अतिक्रमण और गंदगी क्यों बढ़ रही है? 17 जुलाई को प्रशासन के जवाब से तय होगा कि नगर परिषद पारदर्शिता चाहती है या पर्देदारी।