गोकुलदास अस्पताल का लाइसेंस रद्द, 6 घंटे में 6 कोरोना पीड़ितों की मौत का आरोप
Last Updated: मई 8, 2020 " 11:59 पूर्वाह्न"
इंदौर: गोकुलदास अस्पताल का लाइसेंस अस्थाई रूप से रद्द कर दिया गया है। सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने बताया कि 6 घंटे में 6 मौतों के बाद उठे विवाद के बीच कलेक्टर के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। गुरुवार को मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल पर कई तरह के आरोप लगाए थे। इंदौर में गुरुवार देर रात आई रिपोर्ट में 28 नए कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पहचान हुई। इसके बाद इंदौर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1727 हो गई। वहीं 3 लोगों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या 86 तक जा पहुंची है,
स्वास्थ्य विभाग ने इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को सूचित किया था, लेकिन अस्पताल के कर्ताधर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग से संपर्क नहीं किया। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम जांच के लिए अस्पताल पहुंची थी और कई दस्तावेज जब्त किए थे। लाइसेंस रद्द होने के बाद अस्पताल अब नए मरीजों की भर्ती नहीं कर पाएगा। फिलहाल अस्पताल में कुल 13 मरीज भर्ती हैं। इनमें से एक का इलाज आईसीयू में चल रहा है जबकि 12 मरीज जनरल वार्ड में भर्ती हैं, स्वास्थ्य विभाग अब इन्हें दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है। कलेक्टर के आदेश पर हॉस्पिटल की लापरवाही की जांच भी शुरू हो गई है।इससे पहले गुरुवार को गोकुलदास अस्पताल से मरीजो के परिजनों के एक वीडियो के वायरल होने के बाद हंगामा हो गया था। इलाज का बिल बढ़ाने और कोरोना निगेटिव मरीजो की मौत ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए थे। कोविड-19 का डर दिखाकर लोगो कों बेवजह अस्पताल में रोकने का आरोप निजी अस्पतालों पर बीते कई दिनों से लग रहे हैं। हद तो तब हो गई जब गुरुवार को गोकुलदास अस्पताल में कुछ ही समय के अंतराल में एक के बाद एक मरीजों की मौत हो गई और इससे संबंधित एक वीडियो वायरल होने लगा, वीडियो में अस्पताल में भर्ती होकर जान गंवाने वालों के परिजनों ने गोकुलदास अस्पताल प्रबंधन को ना सिर्फ मौत का दोषी ठहराया बल्कि बिल बढ़ाने के चक्कर में बेवजह इलाज को आगे बढ़ाने का आरोप भी लगाया था। वीडियो में परिजनों ने कलेक्टर मनीष सिंह से अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि जो लोग आधे घंटे पहले तक पूरी तरह स्वस्थ थे, उन्हें अस्पताल प्रबंधन ने मौत के घाट उतार दिया, वीडियो में परिजनों द्वारा यह आरोप भी भी लगाए गए थे कि अस्पताल प्रबंधन लगातार समूचे अस्पताल को सैनेटाइज करने की बात कर रहा था लेकिन इसके पहले ही 4 लोगो को अपनी जान गंवानी पड़ी। जांच के लिए पहुंचे सीएचएमओ डॉ. प्रवीण जाड़िया ने बताया कि जिन 3 मौतों का जिक्र वीडियो में था, उनकी मौत आधे घंटे के अंतराल में नहीं हुई थी। उन्होंने अस्पताल से प्राप्त दस्तावेजो के आधार पर कहा कि 3 मौतें 2 घंटे 45 मिनट के अंतराल में हुई हैं। उन्होंने ये भी साफ किया कि गुरुवार को अस्पताल में 4 लोगों की मौत हुई जिनमें से 3 मरीजों की कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी, एक मृतक की रिपोर्ट आना बाकी है। जाड़िया ने कहा कि अस्पताल को सैनेटाइज करने और मरीजों की शिफ्टिंग को लेकर निश्चित नियम हैं जिनका पालन अनिवार्य होता है,