भारत बंद 8 दिसंबर को, किसानों के महाआंदोलन को अबतक इन पार्टियों से मिला समर्थन

  
Last Updated:  दिसम्बर 6, 2020 " 04:06 अपराह्न"

एक नज़र

  1. नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं देशभर के किसान संगठन, दिल्‍ली में हजारों ने डाला हुआ है डेरा
  2. यूपी, पंजाब और हरियाणा में व्‍यापक असर, दिल्‍ली की सीमाओं को ब्‍लॉक करके अड़ गए हैं किसान संगठनों के नेता
  3. केंद्र सरकार से पांच दौर की बातचीत रही है बेनतीजा, नए कानूनों में कुछ संशोधन करने को तैयार है मोदी सरकार
  4. किसान नेता तीनों कानून वापस लेने पर अड़े, मांग पूरी न होने पर धरना जारी रखने की दे चुके हैं चेतावनी

नई दिल्‍ली|
किसान आंदोलन की धार तेज करने के लिए यूनियनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद बुलाया है। केंद्र सरकार से पांच राउंड की बातचीत फेल रही है। मंगलवार को होने वाली बंदी को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन है। प्रदर्शनकारी किसानों की मूल मांग कृषि क्षेत्र से जुड़े तीनों कानून वापस लेने की है, जिसपर केंद्र सहमत नहीं। हालांकि सरकार कानूनों में कुछ संशोधन के लिए राजी है मगर किसान नेता अड़े हुए हैं। किसानों का आंदोलन मुख्‍य रूप से दिल्‍ली-एनसीआर में केंद्र‍ित था, लेकिन अब यह राष्‍ट्रव्‍यापी होता जा रहा है। उत्‍तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्‍ट्र जैसे राज्‍यों के किसानों से भी दिल्‍ली आने की अपील की गई है।

8 दिसंबर को भारत बंद, किन-किन राजनीतिक दलों का समर्थन?
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करेगी। पार्टी के प्रवक्‍ता पवन खेड़ा ने इसे राहुल गांधी के किसानों को समर्थन को मजबूत करने वाला कदम करार दिया। इसके अलावा लेफ्ट पार्टियों ने भी एक संयुक्‍त बयान जारी कर भारत बंद का खुलकर समर्थन किया। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC), लालू प्रसाद यादव की राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD), तेलंगाना राष्‍ट्र समिति (TRS), राष्‍ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी राष्‍ट्रव्‍यापी बंदी का साथ देने का फैसला किया है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी बंद के समर्थन का ऐलान किया है। केजरीवाल ने एक ट्वीट में ‘सभी देशवासियों से अपील की कि सब लोग किसानों का साथ दें और इसमें हिस्सा लें।’

किसान आंदोलन के साथ खड़े हुए हैं ये संगठन
किसानों ने भारत बंद के तहत ‘दिल्‍ली आने वाली सभी सड़कें ब्‍लॉक’ करने की चेतावनी दी है। टोल प्‍लाजाओं पर भी कब्‍जे की योजना है। केंद्र सरकार और कॉर्पोरेट्स के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा। राजनीतिक हलकों से इतर कई व्‍यापारिक यूनियनों और संगठनों ने भी भारत बंद का समर्थन किया है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमिटी (AIKSCC)
  • ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
  • इंडियन नैशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
  • हिंद मजदूर सभा (HMS)
  • ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
  • सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)
  • ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
  • ऑल इंडिया बैंक एम्‍प्‍लॉयीज असोसिएशन (AIBEA)
  • ऑल इंडिया बैंकिंग ऑफिसर्स असोसिएशन (AIBOA)
  • इंडियन नैशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (INBOC)


गतिरोध को 10 दिन गुजरे, नहीं निकला कोई हल
मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के किसानों ने 10 दिन पहले दिल्‍ली की तरफ कूच किया था। किसानों को आंदोलन के लिए दिल्‍ली में जगह दी गई मगर वह बॉर्डर पर ही डट गए। अब धीरे-धीरे देश के बाकी हिस्‍सों से भी किसान दिल्‍ली पहुंच गए हैं। दिल्‍ली-एनसीआर को पंजाब, हरियाणा और अन्‍य राज्‍यों से जोड़ने वाले अधिकतर रास्‍ते बंद हैं। भारत बंद के दिन, ऐसी स्थिति देशभर में देखने को मिल सकती है। रेल सेवाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश होगी।

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